मन के दर्द को समझना और साझा करना मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी: डॉ. मनोज तिवारी
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर 11वीं राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), वाराणसी में मानसिक स्वास्थ्य संवर्धन कार्यशाला आयोजित की गई। वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. मनोज कुमार तिवारी ने अनियमित दिनचर्या, नींद की कमी, नकारात्मक सोच, नशे और कार्य के दबाव को मानसिक स्वास्थ्य के लिए चुनौती बताया।

वाराणसी,उत्तर प्रदेश। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर 11वीं राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) वाराणसी में मानसिक स्वास्थ्य संवर्धन कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने जवानों को मानसिक तनाव के कारणों, उसके दुष्प्रभावों और तनाव प्रबंधन के प्रभावी उपायों की जानकारी दी। वक्ताओं ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल शारीरिक स्वास्थ्य जितनी ही महत्वपूर्ण है और मन की परेशानियों को समझकर दूसरों के साथ साझा करना मानसिक रूप से स्वस्थ रहने में सहायक होता है।
कार्यशाला में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के आयुर्विज्ञान संस्थान स्थित सर सुंदरलाल चिकित्सालय के एआरटीसी के वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. मनोज कुमार तिवारी ने मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले विभिन्न कारणों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अनियमित दिनचर्या, नकारात्मक सोच, पर्याप्त नींद का अभाव, मोबाइल का अत्यधिक उपयोग, नशे की आदत और काम का बढ़ता दबाव मानसिक स्वास्थ्य के लिए चुनौती बन सकते हैं। लगातार तनाव में रहने से व्यक्ति की कार्यक्षमता, व्यवहार और पारिवारिक संबंध भी प्रभावित हो सकते हैं।
डॉ. तिवारी ने मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए नियमित दिनचर्या अपनाने, सकारात्मक सोच विकसित करने, संतुलित आहार लेने और नशे से दूर रहने की सलाह दी। उन्होंने सीमित समय तक मोबाइल का उपयोग करने, अपनी जिम्मेदारियों का उचित निर्वहन करने, सहकर्मियों के साथ बेहतर तालमेल बनाए रखने और परिवार के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताने को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने तनाव के नकारात्मक प्रभावों से बचने के लिए विश्राम संबंधी व्यायामों की जानकारी दी और मानसिक परेशानियों को दबाने के बजाय उन्हें समझने तथा जरूरत पड़ने पर साझा करने पर जोर दिया।
इस अवसर पर भेलूपुर स्थित श्री विवेकानंद स्मारक राजकीय चिकित्सालय के योग प्रशिक्षक मनीष पांडेय ने तनाव प्रबंधन में योग की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने एनडीआरएफ के जवानों को विभिन्न योग अभ्यास कराए और नियमित योग को मानसिक शांति, एकाग्रता तथा तनाव से निपटने में सहायक बताया।
कार्यशाला में डॉ. स्वाति तिवारी, डॉ. शालू और डॉ. सैंधवी ने मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के आयुर्वेदिक उपायों पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि खान-पान, दिनचर्या और सोच का मानसिक स्वास्थ्य पर सीधा प्रभाव पड़ता है। इसलिए सात्विक एवं संतुलित भोजन, नियमित दिनचर्या और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है।
कार्यक्रम में 11वीं एनडीआरएफ की चिकित्सक डॉ. परमजीत कौर, उप कमांडेंट राम भवन यादव, उप कमान अधिकारी संतोष कुमार, इंस्पेक्टर सुधीर सिंह और सोमवीर चौधरी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। उप कमांडेंट राम भवन यादव ने विशेषज्ञों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जवानों के मानसिक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन के लिए इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाने चाहिए।
कार्यशाला का उद्देश्य जवानों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना और उन्हें तनावपूर्ण परिस्थितियों में संतुलन बनाए रखने के व्यावहारिक उपायों से परिचित कराना था। विशेषज्ञों ने संदेश दिया कि मानसिक परेशानी होने पर समय रहते मदद लेना, अपनी भावनाओं को साझा करना और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल के महत्वपूर्ण कदम हैं।




