महाराष्ट्र चुनाव आयोग का अहम फैसला,दस्तावेज अब व्हाट्सऐप से भी भेज सकेंगे मतदाता, बीएलओ करेंगे सत्यापन
महाराष्ट्र में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग ने बड़ा कदम उठाया है। चुनाव आयोग के अधिकारियों से कहा है कि वे वोटर लिस्ट की मौजूदा एसआईआर प्रक्रिया के दौरान वोटरों द्वारा व्हाट्सएप के जरिए भेजे गए दस्तावेजों पर भी विचार करें ।

मुंबई,एजेंसी। महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान नोटिस पाने वाले मतदाताओं को दस्तावेज जमा करने के लिए हर बार व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की जरूरत नहीं होगी। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोक्कलिंगम ने कहा है कि मतदाता आवश्यक दस्तावेज बूथ स्तर अधिकारी (बीएलओ) को व्हाट्सऐप के माध्यम से भी भेज सकते हैं। बीएलओ इन दस्तावेजों को निर्वाचन आयोग की प्रणाली पर अपलोड कर संबंधित निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी के समक्ष सत्यापन के लिए प्रस्तुत करेंगे।
निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार, एसआईआर के दौरान जिन मतदाताओं के नाम पुराने मतदाता रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहे हैं या जिनके रिकॉर्ड में विसंगतियां पाई गई हैं, उन्हें नोटिस जारी किए जा रहे हैं। अधिकारियों की प्राथमिकता मतदाताओं के घर जाकर आवश्यक दस्तावेज एकत्र करने की है। हालांकि, जो मतदाता दस्तावेज व्हाट्सऐप के माध्यम से भेजना चाहते हैं, उनके दस्तावेज भी स्वीकार किए जा सकते हैं और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर ऑनलाइन सत्यापन किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर बीएलओ मतदाता के घर जाकर दस्तावेजों की जांच कर सकते हैं।
महाराष्ट्र के एसआईआर मसौदा मतदाता सूची में बड़ी संख्या में नाम शामिल नहीं हो पाए हैं। निर्वाचन कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार करीब 2.07 करोड़ नाम मसौदा सूची में नहीं हैं। इनमें 76.80 लाख मतदाता ऐसे थे जो घर-घर सत्यापन के दौरान अनुपस्थित मिले या पते पर नहीं मिले, जबकि 75.52 लाख मतदाताओं को स्थायी रूप से स्थानांतरित बताया गया और 34.81 लाख को मृत श्रेणी में रखा गया।
रिपोर्टों के अनुसार, मसौदा सूची से बाहर किए गए करीब 1.5 करोड़ मतदाताओं को अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और डुप्लीकेट समेत संबंधित श्रेणियों में रखा गया है। इनमें से अब तक करीब 3.9 लाख लोगों ने दोबारा मतदाता सूची में शामिल होने के लिए आवेदन किया है।
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोक्कलिंगम ने निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर एसआईआर की प्रक्रिया में कुछ बदलावों की मांग भी की है। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने ऐसे मतदाताओं के लिए प्रणाली में अतिरिक्त दस्तावेज स्वीकार करने का विकल्प देने का सुझाव दिया है, जिनके पास निर्धारित 13 दस्तावेजों में से कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं है। विशेष रूप से कमजोर वर्गों और ऐसे लोगों के मामलों में वैकल्पिक या समकक्ष दस्तावेज स्वीकार करने की व्यवस्था का सुझाव दिया गया है।
एसआईआर प्रक्रिया के तहत मतदाताओं को नोटिस मिलने के बाद दस्तावेजों के आधार पर अपने नाम और पात्रता से संबंधित दावे स्पष्ट करने का अवसर दिया जा रहा है। हाल में निर्वाचन आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि नोटिस पा चुके मतदाताओं को सामान्य परिस्थितियों में व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाने की जरूरत नहीं है और बीएलओ उनके दस्तावेज एकत्र कर प्रणाली पर अपलोड कर सकते हैं।
महाराष्ट्र में एसआईआर को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद भी सामने आए हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि ईसीआईनेट प्रणाली में निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों की वैधानिक शक्तियां प्रभावित हो रही हैं। पार्टी ने प्रक्रिया में अधिक समय दिए जाने की मांग की है। दूसरी ओर निर्वाचन अधिकारियों का कहना है कि दस्तावेजों के सत्यापन और पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में बनाए रखने के लिए आवश्यक प्रक्रियाएं अपनाई जा रही हैं।
निर्वाचन आयोग ने महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 सितंबर से बढ़ाकर 12 अक्टूबर 2026 कर दी है। नोटिस जारी करने और उनके निस्तारण की अवधि 10 नवंबर तक बढ़ाई गई है। इस समयसीमा के बाद अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
नई व्यवस्था के तहत व्हाट्सऐप और ऑनलाइन माध्यम से दस्तावेज स्वीकार किए जाने तथा बीएलओ के स्तर पर घर-घर सत्यापन की सुविधा से उन मतदाताओं को राहत मिलने की संभावना है, जिन्हें एसआईआर प्रक्रिया के दौरान अपने नाम या रिकॉर्ड से जुड़ी विसंगतियों का जवाब देना है।



