छत्तीसगढ़ के चर्चों में गैर ईसाइयों के प्रवेश पर चेतावनी वाले लगे नोटिस
छत्तीसगढ़ में अब कथित धर्म परिवर्तन के लिए हो रही प्रार्थना सभाओं पर विवाद के बाद चर्चों और क्रिश्चियन संगठनों ने एक नोटिस जारी किया है। चर्चों के गेट पर लगाए गए नोटिस बोर्ड में गैर ईसाइयों को बताया गया है कि अगर वह प्रार्थना में शामिल होंगे तो यह उनकी जिम्मेदारी होगी।

धमतरी, छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ में नए धर्मांतरण विरोधी कानून के लागू होने के बाद धमतरी जिले के कुछ चर्चों में गैर ईसाइयों के प्रवेश को लेकर चेतावनी वाले नोटिस लगाए जाने का मामला सामने आया है। जिले के करीब 10 चर्चों में लगे इन नोटिसों में कहा गया है कि प्रार्थना के लिए केवल ईसाई समुदाय के लोगों को प्रवेश की अनुमति है। दूसरे धर्मों के लोग अपनी इच्छा से चर्च में प्रवेश करते हैं तो इसके लिए वे स्वयं जिम्मेदार होंगे।
बताया गया है कि करीब 125 वर्ष पुराने सुंदरगंज मेनोनाइट चर्च सहित जिले के अन्य चर्चों के बाहर हिंदी में ऐसे नोटिस लगाए गए हैं। यह कदम पिछले कुछ समय से प्रार्थना सभाओं में कथित धर्मांतरण को लेकर उठ रहे विवादों के बीच सामने आया है। हालांकि, प्रशासन की ओर से इस संबंध में फिलहाल कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है।
धमतरी जिला ईसाई फोरम के महासचिव डायमंड फिलस के अनुसार, सितंबर में हुई बैठक के बाद चर्चों में चेतावनी वाले बोर्ड लगाने का निर्णय लिया गया था। उन्होंने बताया कि 15 सितंबर को जिला कलेक्ट्रेट में हिंदू संगठनों, सर्व आदिवासी समाज और ईसाई फोरम के प्रतिनिधियों की बैठक हुई थी। उनके मुताबिक जिले में चर्चों समेत करीब 40 स्थानों पर ऐसे बोर्ड लगाए गए हैं।
फिलस ने दावा किया कि नए कानून के प्रावधानों के तहत एक हजार से अधिक लोगों ने जिला कलेक्ट्रेट में शपथपत्र जमा कर यह बताया है कि वे अपनी इच्छा से चर्चों और ईसाई प्रार्थना सभाओं में शामिल हो रहे हैं। वहीं, धमतरी की अतिरिक्त कलेक्टर इंदिरा सिंह देहारी ने इस मामले में प्रतिक्रिया देने से इनकार किया है।
नए कानून में कथित तौर पर जबरन या अवैध धर्मांतरण के मामलों के लिए कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। इसी कानून की पृष्ठभूमि में चर्चों की ओर से गैर ईसाइयों के प्रवेश को लेकर यह कदम उठाए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, नोटिस लगाने के निर्णय और उसके कानूनी आधार को लेकर प्रशासन की ओर से विस्तृत स्थिति स्पष्ट किया जाना अभी बाकी है।




