सत्य निकेतन हादसे के बाद भी पहाड़गंज में अवैध निर्माण के आरोप, तंग गलियों में बहुमंजिला इमारतों को लेकर सवाल
सत्य निकेतन और मालवीय नगर हादसों के बाद दिल्ली में अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई के बावजूद पहाड़गंज की संकरी गलियों में कथित बहुमंजिला होटल, फ्लैट और दुकानों के निर्माण को लेकर स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए हैं। निवासियों ने कई भवनों में सुरक्षा मानकों के उल्लंघन और शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया है। विशेष रूप से चूना मंडी की एक इमारत के झुकने और उसे लोहे के सहारे टिकाए जाने की शिकायत की गई है। लोगों ने मांग की है कि निगम सभी संदिग्ध निर्माणों की तकनीकी जांच कर नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई करे।

राजीव कुमार गौड़/दिल्ली स्टेट हेड
दिल्ली ब्यूरो। राजधानी दिल्ली में हाल के भवन हादसों के बाद नगर निगम की ओर से अवैध और असुरक्षित निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई तेज किए जाने के बावजूद पहाड़गंज की संकरी गलियों में कथित अवैध निर्माण को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इलाके में कई स्थानों पर आवासीय संपत्तियों में अतिरिक्त मंजिलें, दुकानें और होटल बनाए जा रहे हैं। उनका दावा है कि कुछ स्थानों पर पांच से छह मंजिल तक निर्माण किया जा रहा है और संबंधित विभाग को शिकायतें दिए जाने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है।
सत्य निकेतन में सितंबर में पांच मंजिला पीजी इमारत गिरने से सात लोगों की मौत के बाद दिल्ली में भवन सुरक्षा और अनधिकृत निर्माण को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। प्रारंभिक जांच में संबंधित इमारत के पास स्वीकृत भवन योजना नहीं होने, बेसमेंट में अनधिकृत निर्माण और फायर अनापत्ति प्रमाणपत्र नहीं होने जैसी बातें सामने आई थीं। इसके बाद नगर निगम ने राजधानी के विभिन्न इलाकों में अवैध निर्माण और खतरनाक इमारतों के खिलाफ कार्रवाई तेज की।
नगर निगम की कार्रवाई के आंकड़ों के अनुसार 6 से 18 सितंबर के बीच 397 संपत्तियों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई और 152 संपत्तियों को सील किया गया। इससे पहले भी निगम ने विभिन्न क्षेत्रों में अवैध निर्माण के खिलाफ बड़ी संख्या में तोड़फोड़ और सीलिंग की कार्रवाई की थी। निगम ने चार मंजिल से अधिक के अवैध निर्माणों को सील करने के निर्देश भी जारी किए थे।
हालांकि पहाड़गंज के स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र की स्थिति अभी भी चिंता पैदा करने वाली है। उनके अनुसार 4196/1, गली भगवती भवन, तेल मंडी में संकरी गली के भीतर होटल निर्माण का काम चल रहा है। इसी तरह 1041, मुख्य बाजार, पहाड़गंज में भी होटल निर्माण का आरोप लगाया गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार संगतराशन और चूना मंडी की गली नंबर पांच और छह में भी कुछ संपत्तियों को जोड़कर बड़े स्तर पर निर्माण किया जा रहा है।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि कुछ भवनों में निर्धारित मानकों से अधिक मंजिलें बनाई जा रही हैं। उनका कहना है कि ऐसे निर्माणों में स्वीकृत नक्शे, अग्नि सुरक्षा व्यवस्था और भवन की संरचनात्मक सुरक्षा से जुड़े नियमों के पालन की जांच होनी चाहिए। हालांकि इन विशिष्ट संपत्तियों के संबंध में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
सबसे गंभीर आरोप भवन संख्या 2753, गली नंबर छह, चूना मंडी को लेकर लगाए गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुरानी संपत्ति पर बिना पर्याप्त पिलर और मजबूत नींव के बहुमंजिला निर्माण किया गया है। उनका दावा है कि इमारत एक ओर झुक गई है और उसे सहारा देने के लिए लोहे के गर्डर लगाए गए हैं। भू-तल पर दुकानें बनाए जाने की बात भी कही गई है। निवासियों का कहना है कि यदि भवन वास्तव में संरचनात्मक रूप से कमजोर है तो आसपास रहने वाले लोगों और राहगीरों की सुरक्षा के लिए तत्काल तकनीकी निरीक्षण जरूरी है।
स्थानीय लोगों ने करोल बाग जोन के भवन विभाग के अधिकारियों पर भी शिकायतों की अनदेखी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कई बार लिखित शिकायतें देने के बावजूद कथित अवैध निर्माणों के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। निवासियों ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित कनिष्ठ अभियंता और सहायक अभियंता स्तर पर न तो काम रोकने संबंधी प्रभावी कार्रवाई हुई और न ही सभी शिकायतों पर आगे की प्रक्रिया स्पष्ट की गई। इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक विस्तृत पक्ष सामने नहीं आया है।

पहाड़गंज में अवैध निर्माण का मुद्दा नया नहीं है। वर्ष 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष चूना मंडी की गली नंबर नौ में कथित अनधिकृत निर्माण से जुड़ा मामला भी पहुंचा था। अदालत ने संबंधित संपत्ति पर अनधिकृत निर्माण की अनुमति नहीं देने और कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे।
नगर निगम के भवन विभाग की जिम्मेदारी में स्वीकृत भवन योजना के अनुरूप निर्माण की निगरानी, नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर नोटिस और कानूनी कार्रवाई तथा आवश्यक होने पर सीलिंग और ध्वस्तीकरण जैसी कार्रवाई शामिल है। हालिया सत्य निकेतन हादसे के बाद निगम ने भवन योजना, अग्नि सुरक्षा, भवन के उपयोग और संरचनात्मक स्थिति की जांच को लेकर शहरभर में अभियान चलाया है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि पहाड़गंज जैसे घनी आबादी और संकरी गलियों वाले इलाके में किसी भी बहुमंजिला निर्माण की शिकायत को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि जिन भवनों को लेकर संरचनात्मक सुरक्षा संबंधी शिकायतें हैं, उनका स्वतंत्र तकनीकी निरीक्षण कराया जाए और यदि निर्माण नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
स्थानीय लोगों ने राजनीतिक संरक्षण के आरोप भी लगाए हैं। उनका दावा है कि कुछ निर्माणकर्ताओं द्वारा प्रभावशाली लोगों तक पहुंच होने की बात कही जाती है और इसी कारण शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होती। हालांकि इन आरोपों के समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया है और संबंधित राजनीतिक प्रतिनिधियों की ओर से भी इन आरोपों पर कोई स्पष्ट आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन दावों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है।
फिलहाल पहाड़गंज के निवासियों की मुख्य मांग इलाके में चल रहे निर्माण कार्यों का निष्पक्ष निरीक्षण, भवनों की संरचनात्मक सुरक्षा की जांच और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर समयबद्ध कार्रवाई की है। सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में असुरक्षित और अनधिकृत निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर नगर निगम पर निगाहें बनी हुई हैं। ऐसे में सवाल यह है कि पहाड़गंज में जिन भवनों को लेकर स्थानीय लोग शिकायतें कर रहे हैं, उनकी जांच कब और किस स्तर पर होती है और जांच में अनियमितता मिलने पर क्या कार्रवाई की जाती है।





