फरार ईनामी सीएसपी नेहा पच्चीसिया के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी, अब एंटी करप्शन कोर्ट में होगी सुनवाई
एमपी की विवादित व फरार निलंबित कटनी की महिला पूर्व सीएसपी नेहा पच्चीसिया की FIR रद्द कराने की याचिका पर हाईकोर्ट में अब नई बेंच सुनवाई करेगी। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं को लेकर राज्य सरकार की आपत्ति के बाद केस को विशेष रोस्टर वाली पीठ में भेज दिया गया है।

जबलपुर,मध्य प्रदेश। कटनी की पूर्व सीएसपी नेहा पच्चीसिया के खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त करने की मांग वाली याचिका पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सोमवार को महत्वपूर्ण बदलाव हुआ। राज्य सरकार की आपत्ति और केस डायरी के अवलोकन के बाद अदालत ने मामले को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से संबंधित मामलों की सुनवाई के लिए निर्धारित विशेष रोस्टर वाली पीठ के समक्ष भेजने का आदेश दिया। अब मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी।
जानकारी के अनुसार, नेहा पच्चीसिया की याचिका पर सोमवार को न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की पीठ में सुनवाई प्रस्तावित थी। सुनवाई शुरू होते ही राज्य सरकार की ओर से बेंच को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई। सरकार का कहना था कि संबंधित एफआईआर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी शामिल हैं, इसलिए मामले की सुनवाई इस अधिनियम से जुड़े मामलों के लिए निर्धारित रोस्टर वाली पीठ द्वारा की जानी चाहिए।
नेहा पच्चीसिया की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने सरकार की आपत्ति का विरोध किया। उनका कहना था कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं एफआईआर में बाद में जोड़ी गई हैं, इसलिए पहले से निर्धारित पीठ को ही याचिका पर सुनवाई करनी चाहिए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने केस डायरी का अवलोकन किया और मामले को संबंधित विशेष रोस्टर वाली पीठ के समक्ष भेजने का आदेश दिया।
हाईकोर्ट में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए अलग रोस्टर निर्धारित है। अब 22 सितंबर की सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि नेहा पच्चीसिया की एफआईआर निरस्तीकरण याचिका किस पीठ के समक्ष आगे बढ़ेगी और याचिका में मांगी गई राहत पर आगे क्या सुनवाई होती है।
नेहा पच्चीसिया ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त करने की मांग करते हुए हाईकोर्ट का रुख किया है। उनकी ओर से दावा किया गया है कि मामले में उनकी सीधी भूमिका का कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है। वहीं राज्य सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए आरोप लगाया है कि वह जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं। सरकार की ओर से पिछली सुनवाई में उनके विदेश जाने की आशंका के मद्देनजर लुकआउट सर्कुलर की कार्रवाई की जानकारी भी अदालत को दी गई थी।
सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि मामले में सह-आरोपियों के साथ कथित सांठगांठ की जांच की जा रही है। वहीं निचली अदालत से अग्रिम जमानत की याचिका खारिज होने और आरोपियों के खिलाफ इनाम घोषित किए जाने की बात भी सामने आई है। इन सभी आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
इस मामले में एफआईआर अगस्त में दर्ज की गई थी। बाद की जांच में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं जोड़े जाने की जानकारी सामने आई, जिसके आधार पर अब हाईकोर्ट में याचिका की सुनवाई का रोस्टर बदला गया है।




