पटवारी की नौकरी के साथ जारी रखी खाकी की तैयारी, संजय परमार बने पुलिस उपनिरीक्षक भर्ती में प्रदेश टॉपर

तीन बार साक्षात्कार तक पहुंचकर भी नहीं हुआ चयन, असफलताओं को बनाया सफलता की सीढ़ी

शाजापुर/मध्य प्रदेश। सरकारी नौकरी मिलने के बाद बहुत से लोग अपनी तैयारी और बड़े सपनों को विराम दे देते हैं, लेकिन शाजापुर जिले के केवड़ाखेड़ी गांव निवासी संजय परमार ने ऐसा नहीं किया। पटवारी के पद पर कार्यरत रहते हुए उन्होंने पुलिस की वर्दी पहनने के अपने सपने को जिंदा रखा और लगातार मेहनत करते रहे। आखिरकार मध्यप्रदेश पुलिस उपनिरीक्षक एवं सूबेदार भर्ती परीक्षा के अंतिम परिणाम में 595.98 अंक हासिल कर उन्होंने पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
संजय की सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने यह उपलब्धि सरकारी नौकरी की जिम्मेदारियां निभाते हुए हासिल की। पटवारी बनने के बाद आसपास के लोगों ने उन्हें सलाह दी कि अब सरकारी नौकरी मिल गई है, इसलिए आगे पढ़ाई करने की जरूरत नहीं है। लेकिन संजय के लिए पटवारी की नौकरी मंजिल नहीं थी। उनका सपना पुलिस की खाकी वर्दी पहनना और देश एवं समाज की सेवा करना था।
संजय के बड़े भाई सेना में हैं। बचपन से ही सेना और वर्दी के प्रति उनके मन में आकर्षण रहा। पटवारी की नौकरी के दौरान पुलिसकर्मियों को कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाते देखकर उनके भीतर पुलिस सेवा में जाने की इच्छा और मजबूत होती गई। इसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए उन्होंने नौकरी के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी।
संजय की सफलता की कहानी आसान नहीं रही। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान उन्हें सबसे पहले संयुक्त प्रवेश परीक्षा की उन्नत परीक्षा में असफलता मिली। इसके बाद उन्होंने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं की तैयारी शुरू की। वह तीन बार साक्षात्कार तक पहुंचे, लेकिन तीनों अवसरों पर अंतिम चयन नहीं हो सका।
लगातार असफलताओं के बावजूद संजय ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी गलतियों और कमजोरियों को पहचाना और तैयारी का तरीका बदला। पिछली असफलताओं से मिले अनुभव को उन्होंने आगे की तैयारी में इस्तेमाल किया। यही अनुभव बाद में उनकी सफलता की मजबूत नींव बना।
पटवारी की नौकरी के साथ पुलिस भर्ती की तैयारी करना संजय के लिए आसान नहीं था। इसके बावजूद उन्होंने समय का बेहतर प्रबंधन किया। वह प्रतिदिन करीब चार से पांच घंटे पढ़ाई करते थे। सुबह ड्यूटी से पहले और रात में काम समाप्त होने के बाद वह पढ़ाई के लिए समय निकालते थे।
उन्होंने सामाजिक माध्यमों, अनावश्यक बातचीत और घूमने-फिरने से दूरी बना ली। हिंदी, इतिहास और समसामयिक घटनाओं जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष ध्यान दिया। नियमित अध्ययन और अनुशासन को उन्होंने अपनी तैयारी का आधार बनाया।
सरकारी नौकरी मिलने के बाद कई लोगों ने संजय को आगे की पढ़ाई छोड़ने की सलाह दी। उनका मानना था कि सरकारी नौकरी मिल चुकी है, अब इससे बेहतर और क्या चाहिए। लेकिन संजय अपने लक्ष्य को लेकर स्पष्ट थे। वह पटवारी की जिम्मेदारी निभाने के साथ पुलिस की वर्दी पहनने का सपना भी पूरा करना चाहते थे।
उन्होंने लोगों की बातों को अपने लक्ष्य के रास्ते में बाधा नहीं बनने दिया। लगातार तैयारी करते रहे और आखिरकार उन्हें उनकी मेहनत का परिणाम मिला। मध्यप्रदेश पुलिस उपनिरीक्षक और सूबेदार भर्ती परीक्षा का अंतिम परिणाम जारी होने के बाद संजय परमार का नाम सबसे ऊपर रहा। उन्होंने 595.98 अंक हासिल कर प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
भर्ती प्रक्रिया में कुल 500 पदों के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी। लिखित परीक्षा के बाद 5,113 अभ्यर्थी अगले चरण के लिए पात्र हुए। इसके बाद शारीरिक दक्षता परीक्षा और साक्षात्कार के आधार पर अंतिम चयन सूची तैयार की गई। अंतिम परिणाम में 436 अभ्यर्थियों का चयन हुआ, जबकि 64 पद रिक्त रह गए।
संजय परमार की कहानी केवल एक प्रतियोगी परीक्षा में प्रथम आने की कहानी नहीं है, बल्कि यह लगातार प्रयास और लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्प की मिसाल है। संयुक्त प्रवेश परीक्षा की उन्नत परीक्षा में असफलता, मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के साक्षात्कार में तीन बार चयन न होना और पटवारी की नौकरी की जिम्मेदारियों के बावजूद उन्होंने अपने सपने को नहीं छोड़ा।
उनकी सफलता यह संदेश देती है कि सरकारी नौकरी मिलने के बाद भी यदि व्यक्ति के भीतर आगे बढ़ने की इच्छा और लक्ष्य के प्रति समर्पण हो तो वह नई ऊंचाइयां हासिल कर सकता है। संजय ने साबित किया कि असफलता अंत नहीं होती, बल्कि सही दिशा में की गई मेहनत के लिए एक नया सबक होती है।

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