धर्मेंद्र प्रधान के बाद महाराष्ट्र में शिक्षा मंत्री दादा भुसे के इस्तीफे की मांग, कांग्रेस ने दी आंदोलन की चेतावनी
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सरकार में शिवसेना के कोट से मंत्री दादा भुसे के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस की युवा ईकाई ने आंदोलन की चेतावनी दी है। कांग्रेस ने महाराष्ट्र टीईटी और सीईटी के पेपर लीक होने पर दादा भुसे से इस्तीफा देने को कहा है। भुसे एकनाथ शिंदे की शिवसेना के बड़े नेता है।

मुंबई/एजेंसी। महाराष्ट्र की शिक्षा व्यवस्था को लेकर सियासी माहौल गर्माता जा रहा है। सीईटी और टीईटी परीक्षा पेपर लीक के आरोपों के बीच कांग्रेस की छात्र इकाई और युवक कांग्रेस ने राज्य के शिक्षा मंत्री दादा भुसे के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर मंत्री इस्तीफा नहीं देते हैं, तो राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा।
सोमवार को मुंबई स्थित तिलक भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में महाराष्ट्र कांग्रेस एनएसयूआई के अध्यक्ष सागर सालुंखे और मुंबई युवक कांग्रेस की अध्यक्ष जीनत शबरीन ने शिक्षा विभाग के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए। इस दौरान एनएसयूआई और युवक कांग्रेस की ओर से ‘जेन जी यूनिवर्सिटी’ के नाम से शिक्षा मंत्री दादा भुसे की प्रतीकात्मक मार्कशीट जारी की गई, जिसमें उन्हें शिक्षा क्षेत्र में कथित विफलताओं के आधार पर अनुत्तीर्ण घोषित किया गया।
सागर सालुंखे ने आरोप लगाया कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है और महायुति सरकार ने शिक्षा को सेवा के बजाय कमाई का साधन बना दिया है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को बीएलओ जैसे गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया जा रहा है, जिससे स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है और छात्रों का भविष्य दांव पर लग रहा है। अतिरिक्त कार्यभार के चलते शिक्षकों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है, यहां तक कि मुंबई में एक शिक्षक की अत्यधिक कार्य दबाव के कारण मृत्यु होने का भी मामला सामने आया है।
कांग्रेस छात्र इकाई के नेताओं ने आरोप लगाया कि स्कूल शिक्षा, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा तथा चिकित्सा शिक्षा—तीनों विभागों में अव्यवस्था और भ्रष्टाचार व्याप्त है। नंदुरबार जिले में आदिवासी छात्रों से कथित रूप से धोखाधड़ी कर धन वसूली के मामले सामने आए हैं, जबकि राज्य में फर्जी नर्सिंग संस्थानों की संख्या बढ़ रही है। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटील के कार्यकाल पर भी सवाल उठाते हुए नेताओं ने कहा कि छात्रों के साथ खुलेआम आर्थिक शोषण हो रहा है।
नेताओं के अनुसार, कॉलेज प्रवेश प्रक्रिया के लिए करोड़ों रुपये का टेंडर जारी किए जाने के बावजूद अब तक 11वीं कक्षा के लगभग 4 लाख छात्रों का प्रवेश लंबित है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शिक्षा विभाग में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार पर रोक नहीं लगाई गई, तो कांग्रेस सड़क पर उतरकर सरकार से जवाब मांगेगी। इस घटनाक्रम ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।




