गाजियाबाद में पुलिस दावों पर उठे सवाल, शिकायत के बाद भी एफआईआर में देरी से पीड़ित परेशान

गाजियाबाद में पुलिस चौकियों पर पीड़ितों को शिकायत दर्ज कराने में भारी परेशानी हो रही है, जिससे पुलिस के त्वरित न्याय के दावों पर सवाल उठ रहे हैं। सड़क हादसे, रोडरेज और मारपीट जैसे मामलों में एफआईआर दर्ज करने में कई-कई दिन की देरी हो रही है।

गाजियाबाद। कमिश्नरेट पुलिस द्वारा हर शिकायत पर त्वरित कार्रवाई और पीड़ितों को शीघ्र न्याय दिलाने के दावों के बीच जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर पेश कर रही है। जिले में सड़क हादसे, रोडरेज और मारपीट जैसे मामलों में पीड़ितों को कई-कई दिनों तक चौकी और थाने के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, जिससे पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
इतना ही नहीं, कई मामलों में पुलिस आयुक्त कार्यालय तक शिकायत पहुंचने के बावजूद कार्रवाई में तेजी नहीं आई। कहीं पीड़ितों पर समझौते का दबाव बनाया गया तो कहीं उन्हें चौकी से थाने और थाने से चौकी भेजकर टालमटोल किया गया।
नौ दिन बाद दर्ज हुआ रोडरेज का मुकदमा
क्रासिंग रिपब्लिक थाना क्षेत्र के डूंडाहेड़ा निवासी नजरूद्दीन अंसारी 26 जून की रात शुक्र बाजार जा रहे थे। इस दौरान तीन युवकों की बाइक ने उन्हें टक्कर मार दी। विरोध करने पर आरोपियों ने उनके साथ मारपीट की। बीच-बचाव करने आए वसीम पर लोहे की छड़ से हमला कर उसे घायल कर दिया गया।
पीड़ित ने उसी रात शिकायत दी, लेकिन मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। दो दिन बाद पुलिस आयुक्त कार्यालय में शिकायत करने पर भी कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि चौकी पुलिस ने समझौते का दबाव बनाया। अंततः मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत करने के बाद घटना के नौवें दिन, चार जुलाई को मुकदमा दर्ज किया गया।
हादसे के पीड़ित को चौकी से थाने दौड़ाया
28 जून को दुहाई क्षेत्र में सड़क हादसे में मोदीनगर निवासी जगदीश और अंशुल घायल हो गए। पीड़ित पक्ष द्वारा उसी दिन चौकी पर शिकायत देने के बावजूद कई दिनों तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। बाद में उन्हें चौकी से थाने भेज दिया गया। तीन जुलाई को मधुबन बापूधाम थाने में जाकर मुकदमा दर्ज हो सका।
10 दिन बाद लिखा गया सड़क हादसे का केस
दुहाई निवासी शरद कुमार 23 जून को मेरठ रोड पर एक कार की टक्कर से घायल हो गए थे। अगले दिन उन्होंने शिकायत दर्ज कराई, लेकिन पुलिस ने 10 दिन तक मामला दर्ज नहीं किया। आखिरकार तीन जुलाई को मधुबन बापूधाम थाने में एफआईआर दर्ज की गई।
मॉल पार्किंग में बंधक बनाने का आरोप, अब तक कार्रवाई नहीं
सिहानी गेट निवासी विनय ने आरोप लगाया है कि 21 मई को राजनगर एक्सटेंशन स्थित अंसा सिटी मॉल की पार्किंग में दो कर्मचारियों ने उन्हें और उनकी महिला मित्र को जबरन कार्यालय में बैठाए रखा। आरोप है कि अश्लीलता का आरोप लगाकर पांच हजार रुपये की मांग की गई। इस संबंध में मोरटा चौकी पर शिकायत देने के बावजूद अब तक कोई मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है। पीड़ित का कहना है कि पुलिसकर्मी मॉल कर्मचारियों का पक्ष ले रहे हैं।
इन मामलों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ितों का कहना है कि समय पर मुकदमा दर्ज न होने से उन्हें न्याय पाने में देरी हो रही है। वहीं, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सभी मामलों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों से यह स्पष्ट हो रहा है कि जमीनी स्तर पर पुलिस व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है, ताकि पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सके और कानून-व्यवस्था पर लोगों का भरोसा बना रहे।

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