देश की पहली निजी सोने की खदान शुरू: आंध्र प्रदेश में स्वर्णगिरी प्रोजेक्ट बना गेम-चेंजर

आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले के जोंनागिरी में देश की पहली निजी सोने की खदान में वाणिज्यिक परिचालन शुरू हो गया है, जिसका उद्घाटन मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने किया।

बेंगलुरु/एजेंसी। भारतीय माइनिंग सेक्टर में एक ऐतिहासिक कदम के तहत आजादी के बाद पहली बार किसी निजी कंपनी के स्वामित्व वाली सोने की खदान में कमर्शियल उत्पादन पूरी तरह शुरू हो गया है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने बुधवार को कुरनूल जिले के जोंनागिरी (अब स्वर्णगिरी) में इस महत्वाकांक्षी गोल्ड माइनिंग और प्रोसेसिंग प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया।
मुख्यमंत्री ने इस मौके पर परियोजना के पहले चरण का शुभारंभ करने के साथ ही दूसरे चरण की आधारशिला भी रखी। 405 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस प्रोजेक्ट को जियोमैसूर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा डेक्कन गोल्ड माइंस लिमिटेड और त्रिवेणी अर्थमूवर्स के साथ साझेदारी में संचालित किया जा रहा है। यह देश की पहली और इकलौती ऑपरेशनल प्राइवेट प्राइमरी गोल्ड माइन है।
प्राइमरी गोल्ड माइनिंग के तहत चट्टानों और क्वार्ट्ज नसों से सीधे सोना निकाला जाता है। राज्य सरकार ने परियोजना के लिए कुल 1500 एकड़ भूमि आवंटित की है, जिसमें से पहले चरण में करीब 600 एकड़ क्षेत्र में उत्पादन शुरू हो चुका है। खदान के संचालन के लिए ‘हंड्री नीवा सुजला स्रवंती’ योजना के माध्यम से 18 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन से पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है।
वर्तमान में भारत का वार्षिक सोना उत्पादन मात्र 1.5 टन है, जो घरेलू मांग का करीब 1% ही पूरा कर पाता है। ऐसे में स्वर्णगिरी परियोजना को देश की आयात निर्भरता कम करने और विदेशी मुद्रा बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस खदान के चालू होने से कर्नाटक के रायचूर जिले में स्थित सरकारी स्वामित्व वाली हट्टी गोल्ड माइंस का एकाधिकार भी समाप्त हो गया है, जो अब तक देश के कुल सोना उत्पादन का लगभग 99% हिस्सा देती थी।
परियोजना के पहले वर्ष में करीब 400 किलोग्राम सोना उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है, जो देश के कुल उत्पादन का लगभग 20% होगा। दूसरे वर्ष में इसे बढ़ाकर 900 से 1000 किलोग्राम तक पहुंचाने की योजना है। वहीं, दूसरे चरण के पूर्ण संचालन के बाद तीन वर्षों में उत्पादन क्षमता 2 टन सालाना तक पहुंचने का लक्ष्य है।
इस प्रोजेक्ट से राज्य सरकार को 4% रॉयल्टी प्राप्त होगी। शुरुआती उत्पादन पर सरकार को सालाना लगभग 57 करोड़ रुपये का राजस्व मिलेगा, जो उत्पादन बढ़ने पर 144 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। साथ ही, इस परियोजना से करीब 700 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा, जिनमें 80% स्थानीय लोग शामिल होंगे।
मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि खदान के पास ही एक आधुनिक गोल्ड ज्वैलरी मैन्युफैक्चरिंग पार्क स्थापित किया जाएगा, जिससे स्थानीय स्तर पर उद्योग, व्यापार और कौशल विकास को बढ़ावा मिलेगा। भूवैज्ञानिकों के अनुसार, कुरनूल क्षेत्र एक बड़े खनिज बेल्ट का हिस्सा है, जहां सोने के विशाल भंडार की संभावना है। स्वर्णगिरी के अलावा अनंतपुर जिले के कई अन्य क्षेत्रों में भी खोज जारी है।
ऐतिहासिक दृष्टि से भी यह क्षेत्र महत्वपूर्ण रहा है। माना जाता है कि मौर्य काल में सम्राट अशोक के समय यहां सोने का खनन होता था, जिसके प्रमाण आसपास के क्षेत्रों में मिले शिलालेखों से मिलते हैं।
इस ऐतिहासिक पहल के मद्देनजर आंध्र प्रदेश सरकार ने जोंनागिरी गांव का नाम बदलकर स्वर्णगिरी करने को मंजूरी दे दी है। यह परियोजना रायलसीमा क्षेत्र के आर्थिक पुनरुद्धार और राज्य को ‘स्वर्ण आंध्र प्रदेश’ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

आंध्र प्रदेश की गोल्ड माइन ने रचा इतिहास, 2,000 साल बाद फिर शुरू हुआ सोने  का सफर - indias first private gold mine opens in andhra pradesh

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