सहारनपुर में धर्म परिवर्तनकर शहजाद बने शंकर, परिवार के साथ संतों का लिया आशीर्वाद

यूपी के सहारनपुर में एक युवक ने अपने परिवार के साथ इस्लाम धर्म छोड़कर सनातन धर्म अपना लिया। युवक परिवार के साथ हरिद्वार पहुंचा और संतों का आशीर्वाद लिया। लोगों ने युवक का सनातन धर्म में आने पर स्वागत किया।

सहारनपुर/उत्तर प्रदेश। सहारनपुर जिले में मंगलवार को धर्म परिवर्तन और धार्मिक स्थल की पहचान को लेकर दो अलग-अलग घटनाएं चर्चा का विषय बनी रहीं। एक ओर गागलहेड़ी क्षेत्र के बेहड़ी गांव निवासी एक व्यक्ति ने परिवार सहित सनातन धर्म अपनाने के बाद संतों का आशीर्वाद लिया, वहीं दूसरी ओर गोगा म्हाड़ी स्थित गोरक्ष घाट को कथित रूप से ‘फन प्वाइंट’ के रूप में संचालित किए जाने के विरोध में हिंदू संगठनों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।
जानकारी के अनुसार, बेहड़ी गांव निवासी शहजाद ने 21 मई को हरिद्वार स्थित ब्रह्मकुंड के आर्य समाज मंदिर में पत्नी और बच्चों के साथ सनातन धर्म स्वीकार किया। धर्म परिवर्तन के बाद उन्होंने अपना नाम शंकर रख लिया। मंगलवार को वह अपने परिवार के साथ मिरगपुर स्थित श्री गुरु बाबा फकीरादास के दरबार पहुंचे, जहां संतों का आशीर्वाद लिया गया।
इस दौरान भाजपा नेता चौधरी विरेंद्र सिंह गुर्जर के नेतृत्व में परिवार का स्वागत किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित संतों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना कराई। ग्रामीणों ने परिवार को सम्मानित करते हुए पटका पहनाया और धार्मिक प्रतीक भेंट किए।
शंकर ने बताया कि उन्होंने अपने बच्चों के बेहतर भविष्य और अपनी आस्था के अनुसार जीवन जीने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया है। धर्म परिवर्तन के बाद परिवार के अन्य सदस्यों के नाम भी बदले गए हैं। उनकी पत्नी रजिया का नाम सावित्री, पुत्र रिहान का नाम रुद्र, पुत्री मुस्कान का नाम रुक्मिणी तथा दूसरी पुत्री रोजी का नाम दीक्षा रखा गया है।
उधर, गोगा म्हाड़ी स्थित गोरक्ष घाट को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। श्री गोगा म्हाड़ी सुधार सभा एवं विभिन्न हिंदू संगठनों के प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन सौंपकर घाट की धार्मिक पहचान और पवित्रता बनाए रखने की मांग की है।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि गोरक्ष गंगा घाट को बिना व्यापक जानकारी के ठेके पर देकर ‘फन प्वाइंट’ के रूप में संचालित किया जा रहा है। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि यह स्थल धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ है, जहां पूर्व में विधिवत पूजा-अर्चना भी कराई जा चुकी है।
प्रतिनिधियों ने प्रशासन से घाट का मूल नाम और धार्मिक स्वरूप बनाए रखने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो व्यापक आंदोलन किया जाएगा। यह ज्ञापन अपर उप जिलाधिकारी श्वेता पांडेय को सौंपा गया है। प्रशासनिक स्तर पर मामले की जांच की जा रही है।

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