उत्तराखंड में पत्रकार राजीव प्रताप सिंह की संदिग्ध मौत, क्या भारत में सच लिखना बनता जा रहा है गुनाह?

देहरादून/एजेंसी। उत्तराखंड मौजूदा शासन में, सच बोलने और सरकार से सवाल पूछने वाले पत्रकारों के लिए राहें लगातार मुश्किल होती जा रही हैं। धमकी, हिंसा और डराने-धमकाने की घटनाएं आम हो चली हैं, जो भारतीय लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को कमजोर कर रही हैं। विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में भारत की रैंकिंग लगातार गिरना इस कड़वी हकीकत को और पुख्ता करता है। रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (आरएसएफ) द्वारा जारी 2024 की रिपोर्ट में भारत 180 देशों की सूची में 159वें स्थान पर था, जो देश में पत्रकारों की असुरक्षित होती स्थिति को दर्शाता है। पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो पत्रकारों पर हमले, उनके खिलाफ मामले दर्ज करने और यहां तक कि उनकी हत्या की घटनाओं में भी चिंताजनक वृद्धि हुई है।
इसी गंभीर माहौल के बीच उत्तराखंड से एक युवा पत्रकार की संदिग्ध मौत की खबर ने एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उत्तरकाशी जिले की एक झील से पत्रकार राजीव प्रताप सिंह का शव मिलने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता, राहुल गांधी ने इस मामले में तत्काल, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पीड़ित परिवार को बिना किसी देरी के न्याय मिलना चाहिए। जानकारी के अनुसार, पत्रकार राजीव प्रताप सिंह 18 सितंबर से लापता थे। लगभग दस दिनों के बाद, 28 सितंबर को उनका शव जोशीयाड़ा झील से बरामद किया गया। एक दिन पहले ही उनकी कार भागीरथी नदी के किनारे लावारिस हालत में मिली थी।
मंगलवार को राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर हिंदी में एक पोस्ट में अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए लिखा, “उत्तराखंड के युवा पत्रकार राजीव प्रताप सिंह का लापता होना और उसके बाद उनकी मृत्यु न केवल दुखद है, बल्कि भयावह भी है।”
उन्होंने आगे कहा, “मैं शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं और इस मुश्किल समय में उनके साथ खड़ा हूं।” सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के शासन में ईमानदार पत्रकारिता डर और असुरक्षा के साये में जी रही है। जो लोग सच लिखते हैं, जनता की आवाज उठाते हैं और सरकार से सवाल करते हैं, उन्हें धमकियों और हिंसा के जरिए चुप कराया जा रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि राजीव सिंह से जुड़ी पूरी घटना इसी तरह की किसी साजिश की ओर इशारा करती है।
इस मामले पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और मीडिया जगत के कई लोगों ने भी दुख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री धामी ने मामले की “गहन और निष्पक्ष” जांच के आदेश दिए हैं। गौरतलब है कि राहुल गांधी द्वारा साझा किए गए एक मीडिया रिपोर्ट के स्क्रीनशॉट में यह भी कहा गया है कि राजीव प्रताप सिंह ने एक सरकारी अस्पताल की बदहाली को उजागर किया था, जिसके बाद उनकी यह रहस्यमयी मौत हुई। यह घटना देश में पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर एक गंभीर बहस छेड़ गई है।
उत्तराखंड के स्वतंत्र पत्रकार राजीव प्रताप सिंह की संदिग्ध मौत के मामले ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बुधवार को पत्रकार के परिजनों से मुलाकात की और उनकी मौत पर गहरा संदेह जताते हुए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने की मांग की। हरीश रावत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस मुलाकात को साझा करते हुए कहा कि राजीव भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले एक साहसी पत्रकार थे, जिनकी हत्या का अंदेशा है। दीपनगर क्षेत्र में स्थित राजीव के घर पहुंचे हरीश रावत ने उनके पिता मुरारी लाल, पत्नी और अन्य परिजनों से शोक संवेदना व्यक्त की। रावत ने कहा, स्वतंत्र पत्रकार राजीव प्रताप सिंह जो उत्तरकाशी में भ्रष्टाचार के एक मामले के खिलाफ आवाज उठाते शहीद हो गए। आज उनके आवास पर पहुंचकर उनके पिता श्री मुरारी लाल जी, पत्नी और परिजनों से भेंट की। रावत ने राजीव की पत्रकारिता पर जोर देते हुए कहा कि वह उत्तरकाशी में विभागीय अनियमितताओं और सामाजिक मुद्दों पर लगातार सवाल उठा रहे थे। उन्होंने संदेह जताते हुए पूछा, कहीं ऐसा तो नहीं कि उनकी आवाज को दबाने के लिए भ्रष्ट माफिया ने यह कदम उठाया? हरीश रावत ने राज्य सरकार को सलाह दी कि पत्रकारिता निर्भीक रहेगी तो राज्य निर्भय रहेगा। उन्होंने एसआईटी गठन की मांग की और चेतावनी दी कि यदि जल्द खुलासा न हुआ तो केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) जांच की जरूरत पड़ेगी।

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