देश-दुनिया में अचानक वायरल हो गया राजस्थान का 70 साल का बुजुर्ग, जीभ पर कटवाता है सांप

बारां/राजस्थान। राजस्थान की धरती पर लोकदेवता तेजाजी महाराज से जुड़ी कई कथाएं और परंपराएं प्रचलित हैं। इन्हीं परंपराओं में से एक अनूठी झलक बारां जिले के सीसवाली कस्बे में देखने को मिली, जिसने लोगों को हैरत में डाल दिया।
कस्बे के निवासी गंगाधर प्रजापत, जिनकी उम्र 70 वर्ष से अधिक है, घोड़ी पर सवार होकर तेजाजी महाराज की बिंडौरी निकालते हैं। कथिततौर पर इस दौरान उनके शरीर में तेजाजी महाराज के भाव आते हैं। खास बात यह है कि वे सांप के साथ एक ही कटोरी में दूध पीते हैं और अपनी जीभ को नागदेवता से डसवाते हैं। यह परंपरा वर्षों से निरंतर जारी है और श्रद्धालु इसे आस्था का प्रतीक मानते हैं।
कस्बे में हर वर्ष तेजाजी महाराज की स्मृति में नौ दिन का मेला आयोजित होता है। इस वर्ष मेला 10 सितंबर से मंडी प्रांगण में आरंभ होगा। रविवार को घोड़ी पर सवार होकर तेजाजी महाराज की बिंडौरी निकाली गई, जिसमें नागदेवता को टोकरी में बैठाकर ले जाया गया। भोपा गंगाधर प्रजापत बताते हैं कि 25 वर्ष की उम्र से उनके शरीर में तेजाजी महाराज के भाव आने लगे। नाग पंचमी पर वे सांप की बामी (बिल) की पूजा कर नागदेवता को न्योता देते हैं। परंपरा के अनुसार, अनंत चतुर्दशी की रात को नागदेवता कस्बे के आसपास के किसी मंदिर में प्रकट होते हैं और वहां से उन्हें टोकरी में मंडी प्रांगण तक लाया जाता है। इस दौरान महिलाएं नागदेवता का जागरण करती हैं।
पूर्णिमा के दिन कस्बे में तेजाजी महाराज की बिंडौरी निकलती है। इसमें भक्त बड़ी संख्या में शामिल होते हैं। जब बिंडौरी मंडी प्रांगण के चबूतरे (थानक) पर पहुंचती है, तब गंगाधर प्रजापत के शरीर में आए तेजाजी महाराज और टोकरी में विराजमान नागदेवता एक ही कटोरी में दूध ग्रहण करते हैं। इसी समय गंगाधर प्रजापत अपनी जीभ को नागदेवता से डसवाते हैं, जिसे लोग आस्था और विश्वास की पराकाष्ठा मानते हैं। बाद में नागदेवता को सम्मानपूर्वक किसी अन्य बामी (सांप के बिल) में वापस छोड़ दिया जाता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button