गाजियाबाद में 25 साल बाद भी जिला महिला अस्पताल में नहीं बना आईसीयू

हायर सेंटर किया जाता है रेफर

गाजियाबाद। 25 साल बाद भी जिला महिला अस्पताल में आइसीयू नहीं बना है।सीएचसी और संयुक्त अस्पताल में भी आइसीयू नहीं है। आइसीयू न होने से गंभीर महिलाओं को हायर सेंटर रेफर करने का सिलसिला जारी। महिलाओं की मौत का ऑडिट होने का किसी को नहीं है कोई डर नहीं है। यह स्थिति तब है जबकि हर महीने प्रसव के दौरान अथवा प्रसव के बाद संक्रमण ,अधिक रक्तस्राव एवं अन्य बीमारियों के चलते मातृ मृत्यु हो रही हैं।
पिछले दो साल में 50 से अधिक महिलाओं की प्रसव के दौरान या बाद में मौत हो चुकी है। चालू वित्त वर्ष में 28 से अधिक महिलाओं की मौत आन रिकार्ड दर्ज है। खास बात यह है कि जिला महिला अस्पताल में हर महीने नवजात की मौत भी हो रही हैं।
कई बार आइसीयू न होने के चलते गंभीर हालत में नवजात को दिल्ली, नोएडा और मेरठ के हायर सेेंटर को रेफर कर दिया जाता है। इतना हीं नहीं रात्रि में सिजेरियन प्रसव के दौरान हालत बिगड़ने पर गर्भवती को स्वजन खुद ही प्राइवेट अस्पताल ले जाने को मजबूर हो जाते हैं। जिला महिला अस्पताल का नया भवन वर्ष 2000 में बनाया गया था।
सीएमओ डा. अखिलेश मोहन का कहना है कि नया अस्पताल बनने पर आइसीयू का निर्माण जरूरी था। शासन को पत्र भेजकर जिले में आइसीयू बनवाने का प्रयास किया जाएगा। क्रिटीकल केयर यूनिट के बनने से संभवत लाभ होगा।
जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डा. अल्का शर्मा रविवार को सेवानिवृत्त हो गईं। अस्पताल में फेयरवेल पार्टी आयोजित करते हुए उनको विदाई दी गई। इस मौके पर जिला एमएमजी अस्पताल के सीएमएस डॉ. राकेश कुमार सिंह,संयुक्त अस्पताल के सीएमएस डॉ. संजय गुप्ता और डॉ. चरन सिंह मौजूद रहे।
इस मौके पर डॉ. अर्चना त्यागी, डॉ. माला शर्मा, डॉ. रेखा सिंह, डॉ. विमला गौतम, डा. शैफाली और डॉ. पंकज यादव मौजूद रहे। चीफ फार्मासिस्ट केडी दुबे, दिनेश चंद,प्रबंधक तृषा चंदेल और फार्मासिस्ट प्रवीण त्यागी ने गिफ्ट देकर विदाई दी। अस्पताल के कार्यवाहक सीएमएस के तौर पर डा. अभिषेक त्रिपाठी को चार्ज दिया गया है।

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