कृष्ण जन्मभूमि केस में राधा रानी की याचिका खारिज

हाई कोर्ट ने कहा- पुराण पक्षकार बनने के लिए पुख्ता सबूत नहीं

प्रयागराज/उत्तर प्रदेश। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कृष्ण जन्मभूमि विवाद में ‘श्रीजी राधा रानी’ को पक्षकार बनाने के लिए दायर अर्जी खारिज कर दी है। अर्जी में राधा रानी ने खुद को शाही ईदगाह मस्जिद स्थल की 13.37 एकड़ जमीन का सह-स्वामी बताया है। कोर्ट ने कहा कि राधा रानी का यह दावा पुराणों और संहिताओं में दिए गए संदर्भों पर आधारित है, जिसे श्रुत साक्ष्य माना जाता है। राधा रानी की ओर से ऐसा कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया, जिससे यह साबित हो सके कि वह विवादित संपत्ति की सह स्वामी थीं या विवादित संपत्ति में उनका कोई मंदिर था।
याचिका राधा रानी की दोस्त रीना एन सिंह के माध्यम से दायर की गई थी। उनका तर्क था कि वह भगवान श्रीकृष्ण लला विराजमान की पत्नी हैं और दोनों अनादि काल से देवता के रूप में पूजे जाते हैं। वह उस जमीन के स्वामी भगवान श्रीकृष्ण की सह खातेदार हैं जिस पर कथित रूप से शाही ईदगाह मस्जिद बनी है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मथुरा स्थित भगवान श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद मामले में ‘श्रीजी राधारानी’ को पक्षकार बनाने की दायर अर्जी खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्र की एकल पीठ ने कहा कि उन्होंने खुद को स्थल की 13.37 एकड़ जमीन का सहस्वामी बताया है।
हालांकि, अदालत ने यह भी कहा है कि अगर भविष्य में आवेदक इस दावे के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य पेश करता है कि वह वाद की संपत्ति का सह स्वामी है तो उचित समय पर पक्षकार बनाने के प्रश्न पर विचार किया जा सकता है। अगली सुनवाई 4 जुलाई 2025 को होगी।

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