महिलाओं के महाकुंभ स्नान करने के वीडियो वायरल करने के मामले में तीन और आरोपी गिरफ्तार

Three more accused arrested in case of making video of women bathing in Maha Kumbh viral

अहमदाबाद/एजेंसी। गुजरात पुलिस ने साेशल मीडिया के जरिए महिलाओं के निजी और न्यूड वीडियो बेचने और वायरल करने के मामले में तीन और आरोपियों को अरेस्ट किया है। इसके साथ ही कुल आरोपियों की संख्या बढ़कर छह हो गई है। पिछले दिनों गुजरात के राजकोट स्थित पायल मैटरनिटी नर्सिंग होम में इलाज के लिए पहुंची महिलाओं के निजी सीसीटीवी वीडियो लीक होने का खुलासा हुआ था। इसके बाद गुजरात की अहमदाबाद पुलिस की साइबर क्राइम टीम ने मामले की जांच शुरू की थी। इसमें यह पूरा रैकेट देशव्यापी निकाला था। आरोपियों ने नर्सिंग होम की सीसीटीवी वीडियो के साथ मैरेज हाल, पार्लर, गंगा स्नान और महाकुंभ में महिलाओं के स्नान के वीडियो बेचे थे।
अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज को सोशल मीडिया पर वायरल कर पैसे कमाने के मामले में तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में पहले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन अब साइबर क्राइम को बड़ी सफलता मिली है और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। तीनों में से दो आरोपी सीसीटीवी हैक करने का काम कर रहे थे और एक आरोपी उसे मार्केट करने का काम कर रहा था। इस मामले में एक अहम अपडेट यह भी सामने आया है कि आरोपी अस्पताल, बेडरूम, स्कूल, कॉलेज और निजी दफ्तरों के सीसीटीवी फुटेज भी हैक कर रहे थे। नए गिरफ्तार किए गए लोगों में एक सूरत का और दो महाराष्ट्र के हैं। इससे पहले अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने और साइबर क्राइम सेल ने महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश से तीन आरोपियों को पकड़ा था। इनमें लातूर से प्रज्वल तैली, सांगली से प्राज पाटिल और प्रयागराज से चंद्र प्रकाश फुलचंद शामिल हैं
पुलिस ने बताया है कि ये आरोपी पिछलके नौ महीने के अंतराल में अब तक करीब पचास हजार सीसीटीवी हैक कर चुके हैं, जिसकी जांच चल रही है। जांच के दौरान एक चौंकाने वाली बात सामने आई कि आरोपी ज्यादातर अस्पतालों और बेडरूमों के सीसीटीवी फुटेज हैक कर रहे थे, क्योंकि सोशल मीडिया पर विकृत मानसिकता वाले लोगों के बीच इसकी काफी मांग थी और इसके लिए उन्हें पैसे भी मिल रहे थे। सीसीटीवी फुटेज हैक करने के बाद वे फुटेज को वायरल कर देते थे, ताकि उसमें मौजूद कंटेंट को ही बेचा जा सके। जांच में पता चला है कि जांच से पता चला कि आरोपियों ने लगभग दो साल पहले टेलीग्राम के माध्यम से हैकिंग तकनीक सीखी थी।
पुलिस के अनुसार अब तक सीसीटीवी हैक कर उसे वायरल कर सात से आठ लाख रुपये कमा चुके हैं। आरोपियों ने यूट्यूब और बाद में टेलीग्राम ग्रुप से जुड़कर सीसीटीवी फुटेज हैक करने की प्रणाली सीखी। जांच के दौरान पता चला कि अस्पताल का सीसीटीवी फुटेज एक इंस्टाग्राम आईडी पर वायरल हो गया था। सबसे बड़ी बात यह है कि यह इंस्टाग्राम आईडी बांग्लादेश से संचालित हो रही थी। जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने अस्पताल, जिम, सार्वजनिक शौचालय और धार्मिक स्नान क्षेत्रों सहित विभिन्न प्रतिष्ठानों के सीसीटीवी सिस्टम को निशाना बनाया था, ताकि समझौता करने वाली फुटेज प्राप्त की जा सके। इसके बाद फिर इस सामग्री को YouTube और Telegram जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर अपलोड किया गया, जहां वे सदस्यता-आधारित चैनल प्रबंधित करते थे, और इन निजी वीडियो के वितरण से लाभ कमाते थे।

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