दिल्ली में बांग्लादेशी घुसपैठियों के फर्जी आधार और वोटर कार्ड बनाने वाले बड़े गिरोह का भंडाफोड़, 12 गिरफ्तार
A big gang making fake Aadhar and voter cards of Bangladeshi intruders in Delhi busted, 12 arrested

- गिरफ्तार आरोपितों में सात भारतीय व पांच बांग्लादेशी नागरिक शामिल -सातों भारतीय ही बांग्लादेशियों के बनवा रहे थे फर्जी आधार, पैन व वोटर कार्ड।
- शेष पांच बांग्लादेशियों पर एक बांग्लादेशी नागरिक की हत्या व लूटपाट समेत अवैध तरीके से भारतीय दस्तावेज बनवाने का है आरोप।
राजीव कुमार गौड़/दिल्ली ब्यूरो। राजधानी में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान करने के लिए चलाई जा रही मुहिम के बीच दक्षिण जिला पुलिस के वाहन चोरी निरोधक दस्ते ने बांग्लादेशियों का फर्जी भारतीय दस्तावेज (आधार, पैन व वोटर कार्ड) बनाने वाले एक सिंडिकेट का भंडाफोड़ कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। पुलिस ने इस मामले में 12 आरोपितों को गिरफ्तार किया है, जिनमें सात भारतीय नागरिक हैं, इनमें फर्जी दस्तावेज बनाने, आधार आपरेटर, वेबसाइट डेवलपर व एजेंट आदि शामिल हैं। ये भारतीय ही बांग्लादेशी नागरिकों के फर्जी भारतीय दस्तावेज बनवा कर बांग्लादेशी नागरिकों के अवैध आप्रवासन को बढ़ावा दे रहे थे।
फर्जी दस्तावेज बनाने के लिए आरोपितों ने 2023 में जनता प्रिंट्स डाट साइट नाम से फर्जी वेबसाइट बना रखी थी। शेष पांच बांग्लादेशी हैं, जिनमें चार पर संगम विहार में एक बांग्लादेशी नागरिक से लूटपाट व हत्या समेत अवैध रूप से भारतीय दस्तावेज बनवाने और एक महिला पर फर्जी दस्तावेज बनवाने का आरोप है। सभी 12 आरोपितों को रिमांड पर लेकर पुलिस पूछताछ कर रही है। दक्षिण जिला के डीसीपी अंकित चौहान का कहना है कि एक माह पहले उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना के निर्देश पर बांग्लादेशियों की पहचान के लिए दक्षिण जिला पुलिस द्वारा चलाई जा रही मुहिम के तहत इस बड़े रैकेट का पता चला है।
20 अक्टूबर की मध्यरात्रि 12 बजे एक महिला ने संगम विहार थाना पुलिस को सूचित कर बताया कि उसका पति सेंटू शेख उर्फ राजा घर में बेहोश पड़ा हुआ है। पुलिस जब उसके घर पहुंची तब वह मृत पाया गया। 21 अक्टूबर को पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीपी अभिनेंद्र जैन, नीरज टोकस, एसएचओ उमेश शर्मा व इंस्पेक्टर उमेश यादव के नेतृत्व में आठ टीम बनाकर जांच शुरू कर दी गई। जांच से पता चला कि उक्त हत्याकांड चार बांग्लादेशियों मिदुल मियां उर्फ आकाश अहमद, फरदीन अहमद उर्फ अभी अहमद समेत दो महिलाओं ने अंजाम दिया था। जिसके बाद चारों को गिरफ्तार कर लिया गया।
हत्या के पीछे का मकसद यह सामने आया कि सेंटू शेख उक्त चारों को अक्सर किसी न किसी बहाने धमकी देता था। इसलिए उन्होंने एक माह पहले सेंटू शेख की हत्या की योजना बनाई थी। योजना अनुसार चारों ने सेंटू की गला घोंटकर हत्या करने के बाद उसके पास मौजूद नकदी और सामान लूट लिया था।
पुलिस ने लूटा गया सामान बरामद कर लिया। पूछताछ से पता चला कि चारों डेढ़ साल पहले अवैध रूप से भारत में दाखिल हुए थे और फर्जी भारतीय आइडी हासिल कर एक साल से संगम विहार में रह रहे थे। पूछताछ के दौरान इन्होंने अपने बांग्लादेशी पहचान पत्र (चिप-आधारित एनआइडी कार्ड) व जन्म प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए। पुलिस ने जब सेंटू शेख के घर की तलाश ली तब वहां से 21 आधार कार्ड, चार मतदाता पहचान पत्र और आठ पैन कार्ड मिले जिनके बांग्लादेशी नागरिकों के होने का संदेह है। इस पर पुलिस की जांच अवैध आप्रवासन की सुविधा के लिए नकली भारतीय दस्तावेज, मार्ग और तंत्र बनाने में शामिल गिरोह की ओर बढ़ी और पूरा मामला खुल गया।




