अब दिल्ली में कंट्रोल होगा क्राइम! बदमाशों का सुराग दे रहे दिल्ली पुलिस के डिजिटल ‘मुखबिर’
Now crime will be controlled in Delhi! Delhi Police's digital 'informers' are giving clues about the criminals

नई दिल्ली/एजेंसी। पुलिस के लिए काम करने वाले मुखबिर अब बीते जमाने की बात हो गए हैं। अब दिल्ली पुलिस को एआई (आर्टिफिशल इंटेलिजेंस) और एफआरएस(फेस रिकग्निशन सिस्टम) जैसे डिजिटल टूल्स ‘मुखबिर’ बनकर अपराध और अपराधियों का सुराग दे रहे हैं। यूं तो पुलिस के लिए सीसीटीवी कैमरे बदमाशों का सुराग देते थे। मगर अब एआई/ एफआरएस और अन्य सॉफ्टवेयर तफ्तीश में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
इसी साल जनवरी में दिल्ली पुलिस ने इनकी मदद से गीता कॉलोनी फ्लाईओवर के नीचे एक युवक की हत्या की गुत्थी सुलझाई। पुलिस को एआई के इस्तेमाल से न केवल मृतक की पहचान करने में मदद मिली, बल्कि हत्या की वारदात में शामिल मुख्य आरोपी को भी पकड़ने में कामयाबी मिली। युवक की हत्या गला घोंटकर की गई थी। चेहरा बिगड़ा हुआ था। उसी चेहरे की फोटो को एआई की मदद से ठीक किया गया। आगे की तफ्तीश में शव की पहचान और आरोपी का सुराग मिला।
इसी तरह एआई बेस्टड एफआरएस (फेस रिकग्निशन सिस्टम) की मदद से नॉर्थ वेस्ट जिला पुलिस ने दो दिन पहले प्रॉपर्टी चीटर को गिरफ्तार किया। फर्जी पहचान पत्रों का इस्तेमाल कर आरोपी ने दूसरे नाम से दस्तावेज बनवाए। मगर बैंक अकाउंट में फॉर्म पर चिपकी फोटो को फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) ने बेनकाब कर दिया। पिछले हफ्ते बुराड़ी पुलिस ने चोरी के संदिग्ध की एआई की मदद से तस्वीरें तैयार की और उसकी पहचान कर उसे गिरफ्तार कर लिया। 30 नवंबर को एआई बेस्ड एफआरएस की मदद से तिमारपुर पुलिस ने कैमरे में कैद संदिग्ध को गिरफ्तार किया। इसी तरह 27 नवंबर को एआई की मदद से कुछ ही घंटे में सदर बाजार पुलिस ने एक आरोपी को दबोच लिया। उसने एक युवती का मोबाइल लूटा था। सीसीटीवी में कैद धुंधली तस्वीर को एफआरएस से फिल्टर किया गया। आरोपी की पहचान होने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस अफसर के मुताबिक इसी तरह के कई केस हाल ही में सॉल्व हुए हैं।
पुलिस अफसर के मुताबिक, एआई और एफआरएस की मदद से अब तक 8 केस सॉल्व किए गए हैं। इनके इस्तेमाल से तफ्तीश को और अधिक तेज, प्रभावी और सटीक बनाया जा सकता है। क्राइम प्रिडिक्शन और पैटर्न एनालिसिस में एआई पुलिस को यह बताने में मदद करता है कि किस एरिया में क्राइम होने के चांस हैं। सर्विलांस सिस्टम में एआई आधारित कैमरे किसी संदिग्ध गतिविधि का पता लगा लेते हैं। ये कैमरे चेहरे की पहचान, गाड़ी की नंबर प्लेट की पहचान और विडियो एनालिसिस के माध्यम से ट्रैक कर सकते हैं। संदिग्ध या लापता की पहचान में चेहरा और अन्य बायोमीट्रिक डेटा के माध्यम से एआई संदिग्ध की पहचान करने में मददगार है।
एफआरएस एक ऐसा सॉफ्टवेयर है, जो चार साल पहले 15 अगस्त और 26 जनवरी की सुरक्षा तैयारियों के दौरान सामने आया। मगर अब अपराधियों को पकड़ने में भी मदद ली जा रही है। पुलिस किसी की फोटो या विडियो से उसकी पहचान कर सकती है, जैसे किसी क्राइम सीन या पब्लिक प्लेस पर एक शख्स के चेहरे की पहचान करना। किसी चोरी में चेहरे का रिकॉर्ड सिस्टम से जल्दी ट्रैक किया जा सकता है। लापता लोगों का पता लगाने में फोटो और पब्लिक प्लेस पर लगे कैमरों से ट्रैक कर लिया जाता है।




