जयशंकर से मिले चीनी विदेश मंत्री: क्‍या भारत-चीन के बीच सीधी उड़ान सेवा होगी शुरू?

Chinese Foreign Minister meets Jaishankar: Will direct flight service start between India and China?

नई दिल्ली/एजेंसी। पूर्वी लद्दाख के पास वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चल रहे सैन्य तनाव को समाप्त करने के बाद भारत और चीन ने अपने द्विपक्षीय संबंधों के अगले चरण पर बातचीत शुरू कर दी है। इसके तहत ब्राजील की राजधानी रियो डी जनेरो में विदेश मंत्री एस जयशंकर और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई बैठक में द्विपक्षीय संबंधों के दूसरे सभी आयामों पर बात हुई।
भारत-चीन के विदेश मंत्रियों के बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करने, साझा नदियों के जल बंटवारे पर डाटा का आदान-प्रदान करने और दोनों देशों के बीच फिर से सीधी उड़ान सेवाओं की शुरुआत जैसे मुद्दों पर भी बात आगे बढ़ी है।
इसके अलावा यह भी सहमति भी बनी है कि सीमा विवाद के स्थायी समाधान के लिए विशेष प्रतिनिधि स्तर पर होने वाली बातचीत भी शीघ्र शुरू की जाएगी। बैठक में इस पर भी सहमति बनी है कि अगले वर्ष कूटनीतिक संबंधों के 75वीं वर्षगांठ पर कई तरह के द्विपक्षीय कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
21 अक्टूबर, 2024 को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (कजान, रूस) के दौरान मोदी और शी जिनपिंग के बीच हुई मुलाकात में अप्रैल, 2020 से चल रहे सैन्य तनाव को समाप्त करने की सहमति बनी थी। उसके दो हफ्तों के भीतर ही जिन दो स्थलों पर दोनों देशों की सेनाओं के बीच पेट्रोलिंग को लेकर विवाद चल रहा था, उसे सुलझा लिया गया था।
ब्राजील की राजधानी रियो डी जनेरो में सोमवार को देर रात हुई उक्त बैठक में जयशंकर ने कहा कि ”भारत बहुधुव्रीय विश्व व बहुधुव्रीय एशिया के प्रति प्रतिबद्ध है। जहां तक भारत की विदेश नीति का सवाल है तो यह सिद्धांतों पर आधारित और स्थिर है। हम किसी भी एक शक्ति के वर्चस्व के खिलाफ हैं। भारत किसी भी देश के साथ अपने रिश्ते को किसी दूसरे देश के साथ जोड़ कर नहीं देखता। जी-20 और इसके पहले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान हमारी मुलाकात हुई है। इन दोनों प्लेटफार्मों में हमारा योगदान इनके परिणाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।”
जयशंकर ने आगे कहा, ”यह बताता है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में दोनों देशों का क्या महत्व है। कजान (ब्रिक्स बैठक के दौरान) दोनों देशों के नेताओं के बीच हमारे द्विपक्षीय रिश्तों के भविष्य को देख कर ही सहमति बनी थी। मुझे इस बात की खुशी है कि जैसी योजना थी उसी के मुताबिक क्रियान्वयन हुआ है।”
चीन के विदेश मंत्रालय की तरफ से जो सूचना दी गई हैं, उसमें बताया गया है कि वांग यी ने बैठक में कहा कि भारत व चीन पड़ोसी विकासशील देश हैं। इनके बीच असमानताओं से ज्यादा समानताएं हैं। ऐसे में दोनों देशों को एक दूसरे के विकास को अवसर के तौर पर देखना चाहिए और साझा विकास के लिए आपस में काम करना चाहिए। उन्होंने यह भी माना का भारत भी चीन की तरफ से गुटनिरपेक्ष विदेशनीति अपनाते हैं और बहुदेशी संगठनों को ज्यादा लोकतांत्रिक बनाने के पक्षधर हैं। वांग यी ने कहा कि दोनों देशोों को ज्यादा उड़ान सेवा शुरू करने , दोनों देशों के नागरिकों-कारोबारियों व बुद्धिजीवियों को ज्यादा वीजा देने का आग्रह किया।

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