एक साल बाद ही कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर बने पुल में आई दरारें

एनएचएआई की कार्य प्रणाली पर उठने लगे सवाल

बिलासपुर/हिमाचल प्रदेश। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में बने मंडी-भरारी पुल में बड़ी-बड़ी दरारें आ गई हैं। इससे कीरतपुर-मनाली हाईवे की गुणवत्ता पर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं और जांच की मांग तेज हो गई है। यह पुल चंडीगढ़-मनाली हाईवे पर भाखड़ा बांध जलाशय के ऊपर बना है और 750 मीटर लंबा है। पिछले साल ही इस पुल को आम जनता के लिए खोला गया था, लेकिन निर्माण के एक साल के अंदर ही इसमें दरारें आ गईं। लगभग एक हफ़्ते पहले पहली बार दरारें दिखाई दी थीं, जिसके बाद स्थानीय प्रशासन को पुल की एक लेन को बंद करना पड़ा और दूसरी लेन से ही सभी वाहनों को निकाला जा रहा है।
कुछ दिन पहले घटनास्थल का दौरा करने वाले पूर्व मंत्री और पूर्व विधायक राम लाल ठाकुर ने बताया कि हाईवे में आई दरारों से भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा नियुक्त की गई कंपनी द्वारा घटिया सड़क निर्माण का खुलासा हुआ है। राम लाल ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहिष्णुता का दावा करती है और देखिए उनके दावों का कैसे पर्दाफाश हो रहा है। अगर भरारी पुल की निर्माण गुणवत्ता ऐसी है, तो आप बाकी हाईवे और उस पर बने पुलों का अंदाज़ा लगा सकते हैं। हमने यह भी देखा कि पुल का एक हिस्सा भी झुक गया है।
पुल के निर्माण में लापरवाही का आरोप
बिलासपुर ज़िला परिषद के उपाध्यक्ष मान सिंह धीमान ने भी घटनास्थल का दौरा किया। उन्होंने एनएचएआई और उसकी नियुक्त कंपनी पर भरारी पुल के निर्माण में लापरवाही का आरोप लगाया। यह पुल झंडूता और घुमारवीं उप-मंडलों की पंचायतों को बिलासपुर उप-मंडल से जोड़ता है। बिलासपुर स्थित फोरलेन विस्थापित और प्रभावित समिति (एफवीपीएस) के महासचिव मदन लाल शर्मा ने कहा कि हाईवे कई अन्य जगहों पर भी धंस रहा है। एफवीपीएस एक ऐसा संगठन है जो हाईवे से जुड़े मुद्दों को उठाता रहा है।
शर्मा ने दावा किया कि यह केवल भरारी पुल ही नहीं है जिसमें दरारें आई हैं। कुल्लू, मंडी और बिलासपुर ज़िलों में हाईवे के कई अन्य हिस्से धंस रहे हैं। फुटपाथ और फुट ओवरब्रिज में भी दरारें दिखाई देने लगी हैं, जिनमें सुंदरनगर के पुंग भी शामिल है। यहां तक कि कुछ दिन पहले हाईवे पर स्वारघाट के पास एक निर्माणाधीन सुरंग का हिस्सा भी ढह गया था। एनएचएआई और उसके द्वारा नियुक्त संगठनों ने कभी भी काम की गुणवत्ता की परवाह नहीं की और वे बस जल्द से जल्द हाईवे का काम खत्म करना चाहते थे।
एनएचएआई पर लगाए आरोप
शर्मा ने कहा कि जब पारदर्शिता की बात आती है तो एनएचएआई सबसे खराब है। आप एनएचएआई से कुछ भी सवाल नहीं कर सकते। इसने बार-बार मांग के बावजूद किरतपुर-मनाली हाईवे से जुड़ी कोई भी जानकारी सार्वजनिक नहीं की है, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला है, जिसके परिणामस्वरूप घटिया काम हुआ है जैसा कि अब हम देख सकते हैं। बाकी बातें तो दूर, एनएचएआई ने अभी तक बार-बार मांग के बावजूद किरतपुर-मनाली हाईवे की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की है।एनएचएआई के एक अधिकारी ने कहा कि पुल की मरम्मत का काम शुरू हो गया है और जल्द ही प्रभावित लेन को यातायात के लिए फिर से खोल दिया जाएगा।

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