एक करोड़ के इनामी शीर्ष माओवादी मिसिर बेसरा दस्ते के 15 सदस्यों का सरेंडर

चाईबासा/झारखंड। लोकसभा चुनाव के पहले झारखंड पुलिस को बड़ी सफलता मिली। आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सली कोल्हान और चाईबासा के सारंडा इलाके में सक्रिय थे और वे एक करोड़ रुपये के इनामी नक्सली मिसिर बेसरा दस्ते के सदस्य हैं। पुलिस केंद्र चाईबासा में डीआईजी कोल्हान, डीआईजी ऑपरेशन सीआरपीएफ और पश्चिमी सिंहभूम जिले के डीसी और एसपी की उपस्थिति में 15 नक्सलियों ने सरेंडर किया। सरेंडर करने वाले 15 माओवादियों में एक नाबालिग भी शामिल है। इसके अलावा दो महिला नक्सली भी शामिल हैं।
पुलिस के सामने हथियार डालने वाले 15 माओवादियों में 45 वर्षीय दुरुवा कोड़ा शामिल है। दुरूवा के खिलाफ विभिन्न थाना क्षेत्रों में आठ मामले दर्ज है। 29 वर्षीय चंद्रोमोहन उर्फ चंद्रो अंगारिया उर्फ रोशन ने भी सरेंडर किया। चंदो के खिलाफ भी आठ मामले दर्ज है। सरेंडर करने वाले 49 वर्षीय पगला गोप उर्फ घासीराम गोप के खिलाफ पांच, 23 वर्षीय विजय बोयपाई के खिलाफ चार, 46 वर्षीय बिरसिंह कोड़ा के खिलाफ दो, 44 वर्षीय जोगेर कोड़ा के खिलाफ 2, पेलोंग कोड़ा के खिलाफ 2 मामले दर्ज है। इसके अलावा 19 वर्षीय सोनु चंपिया लोकल गुरिल्ला स्कॉयड सदस्य रहा है। 49 वर्षीय रामजा पूर्ति के खिलाफ 2, एक नाबालिग के खिलाफ भी टोंटो थाना में एक केस दर्ज है। सोहन सिंह हेम्ब्रम, डोरन चांपिया, सुशील उर्फ मोगा चांपिया और मनी चांपिया भी दस्ता की सक्रिय सदस्य रही है।
एक करोड़ के इनामी नक्सली मिसिर बेसरा दस्ते के 15 सदस्य काफी दिनों से हिंसा का रास्ता छोड़ कर मुख्य धारा में वापस लौटने के लिए पश्चिमी सिंहभूम जिले के वरीय पुलिस पुलिस अधिकारियों के साथ संपर्क में थे। पुलिस पर भरोसा कर अब वे सभी जंगल से बाहर आए और हथियार डालने का काम किया। हथियार डालने वाले नक्सलियों ने बताया कि माओवादियों के शीर्ष नेताओं की ओर से उनका शोषण हो रहा था। उन सभी को भय और दहशत समेत अन्य कारणों से संगठन में काम करने के लिए मजबूर किया गया। हथियार डालने वाले नक्सली संगठन के केंद्रीय कमेटी के सदस्य मिसिर बेसरा उर्फ सागर जी और पतिराम मांझी उर्फ अनल दा की टीम के काम कर चुके हैं। उनसभी को कोल्हान और सारंडा के सुदूर जंगल पहाड़ी क्षेत्रों के चप्पे-चप्पे की जानकारी है।
झारखंड के सारंडा और कोल्हान क्षेत्र में करीब तीन दशक तक माओवादियों की मजबूत पकड़ रही। सारंडा के घने जंगलों को माओवादियों ने अपना सुरक्षित ठिकाना बनाया था। लेकिन सुरक्षा बलों की ओर से चलाए जा रहे अभियान से माओवादियों का प्रभाव इलाके से लगभग खत्म हो गया है। सुरक्षा बलों की ओर से 2022 से लगातार इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। वर्ष 2022 से अब तक 161 नक्सलियों की गिरफ्तारी हुई है। जबकि 2022 और 2023 में 11 नक्सलियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया। इसके माओवादियों के ठिकाने से 375 विस्फोटक, हथियार और कारतूस बरामद किए गए। इसके अलावा 10 अस्थायी कैंप और 15 बंकरों को ध्वस्त किया गया।

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