गाजियाबाद के स्वास्थ्य विभाग की मिली भगत से बिना एनओसी चल रहे 72 नशा मुक्ति केंद्र

गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में नशा मुक्ति केंद्रों का अलग ही खेल चल रहा है। सूत्रों के अनुसार जिले में अवैध रूप से चल रहे नशा मुक्ति केंद्रों पर स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई नहीं कर रहा है। शासन स्तर से नशा मुक्ति केंद्रों को एनओसी भी नहीं दी जा रही है। इसके बावजूद जिले में 72 नशा मुक्ति केंद्र बिना एनओसी के चल रहे हैं। मामले में डीएम भी कार्रवाई के निर्देश दे चुके हैं। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने नोटिस तो जारी किए, लेकिन कार्रवाई के नाम पर नतीजा अभी तक सिफर ही रहा।
जिले में पहले 100 से ज्यादा नशा मुक्ति केंद्र चल रहे थे, लेकिन बीते साल लोनी के नशा मुक्ति केंद्र में एक मरीज की मौत के बाद शासन स्तर से सख्ती की गई थी। प्रशासन के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने छापेमारी कर पांच से ज्यादा नशा मुक्ति केंद्रों को सील किया था और अन्य को नोटिस जारी किए थे। इसके बाद नशा मुक्ति केंद्रों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। विभाग के सूत्रों का कहना है कि जिले में अवैध रूप से चल रहे 35 से ज्यादा नशा मुक्ति केंद्र बंद हो चुके हैं। फिलहाल लगभग 72 केंद्र चल रहे हैं।
शासन की ओर से जुलाई 2023 तक ही इनकी एनओसी थी। अब नशा मुक्ति केंद्रों को एनओसी नहीं दी जा रही है। लिहाजा जिले में सभी केंद्र अवैध रूप से चल रहे हैं। इन केंद्रों में 1500 से ज्यादा मरीजों का उपचार चल रहा है। गंभीर बात यह है कि अधिकांश केंद्रों में न तो डॉक्टर हैं और न ही सुविधाएं। आपात स्थिति से निपटने के लिए भी व्यवस्था नहीं है। जिला सर्वलिांस अधिकारी डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि ऐसे तीन केंद्रों को सील किया गया था। डीएम के निर्देश पर जल्द संयुक्त कमिटी बनाकर कार्रवाई की जाएगी।
स्पष्ट गाइडलाइंस नहीं
नशा मुक्ति केंद्रों के लिए शासन स्तर से स्पष्ट गाइडलाइंस नहीं हैं। ऐसे में उनके खिलाफ कार्रवाई में परेशानी होती है। इसके अलावा जांच के दौरान नशा मुक्ति केंद्रों में मरीजों के लिए समुचित व्यवस्था भी नहीं मिली थी। कई जगह तो केवल दो कमरों में केंद्र चलते मिले। इनमें डॉक्टर और दवाओं की भी व्यवस्था नहीं थी। टॉइलट और अन्य जरूरी सुविधाएं भी नहीं मिलने पर केंद्रों को नोटिस जारी किए गए थे।
मरीजों का वेरिफिकेशन भी नहीं
जिले के नशा मुक्ति केंद्रों में आसपास के जिलों के भी मरीज मिले थे। इनमें से बहुत से मरीजों का तो वेरिफिकेशन भी नहीं किया गया था। केंद्र पर मरीजों का आधार या वोटर आईडी कार्ड भी जमा नहीं था। ऐसे मरीजों का वेरिफिकेशन करने के भी निर्देश दिए गए थे।

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