दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट के अंदर हिंदी में टाइप हुआ पहला ऑर्डर, स्टेनोग्राफर से लेकर वकील तक के छूट गए पसीने

नई दिल्ली/एजेंसी। कड़कड़डूमा कोर्ट के मीडिएशन सेंटर में उस समय सबके पसीने छूट गए, जब उन्हें पता चला कि अब से सारे ऑर्डर हिंदी में टाइप किए जाएंगे। दरअसल एडवोकेट ने बताया कुछ महीनों पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने एक जजमेंट दिया था। इसमें सभी डिस्ट्रिक्ट के मीडिएशन सेंटर को आदेश दिया गया था कि वह अब अपने यहां सारे ऑर्डर हिंदी में टाइप करवाएंगे। पहले तो मीडिएशन सेंटर ने इस आदेश को हल्के में लिया। मगर जब हाईकोर्ट ने उस आदेश पर मीडिएशन सेंटर से यह डेटा मांगा कि अब तक उन्होंने कितने ऑर्डर हिंदी में जारी किए, तो शनिवार से मीडिएशन सेंटर हरकत में आए। यह कड़कड़डूमा कोर्ट का पहला हिंदी में जारी हुआ ऑर्डर तो है ही, साथ ही इसकी भी संभावना है कि यह दिल्ली का पहला ऐसा ऑर्डर हो, जो हिंदी में टाइप हुआ हो।
पेश मामला, पति-पत्नी के बीच घरेलू हिंसा का था। हालांकि दोनों पहले ही रजामंदी से तलाक ले चुके थे। 12 साल की बेटी की कस्टडी पिता को मिली थी। मां महीने में दो बार बेटे से मिल सकती है। मगर उनकी शिकायत थाने में पेंडिंग थी। जिस पर एफआईआर दर्ज हो गई थी। कोर्ट में चार्जशीट फाइल हुई, तो उन्हें केस दर्ज होने के बारे में पता चला। अब दोनों उस एफआईआर को खत्म करवाना चाहते थे। इसलिए उन्हें मीडिएशन सेंटर में भेज दिया गया था। वहां दोनों ने सेटलमेंट होने जाने की बात बताई। जिसके बाद उन्हें हाईकोर्ट जाकर एफआईआर खत्म करवाने के लिए कहा गया। मामले में पुरुष के वकील एडवोकेट मनीष भदौरिया ने बताया कि जब इस मामले में ऑर्डर टाइप होने की बात आई तो मीडिएटर, स्टेनोग्राफर और वकील सभी के पसीने छूट गए। बात सेंटर में फैली तो कई मीडिएटर ने तो यह तक कह दिया कि हम से नहीं हो पाएगा।
कोर्ट में जो ऑर्डर टाइप करते हैं, उन्हें स्टेनोग्राफर कहते हैं। कोर्ट में लगभग 20 साल पुराने स्टेनोग्राफर होते हैं। इनकी भर्ती के दौरान शर्त होती है कि उन्हें अंग्रेजी और हिंदी दोनों में टाइपिंग आनी चाहिए। मगर जब वर्षों से हिंदी में टाइपिंग नहीं की, तो अब टाइपिंग कर पाना मुश्किल था। इसलिए उन्होंने एक पुराने कोर्ट के ऑर्डर को गूगल पर हिंदी में ट्रांसलेट किया। जब ऑर्डर ट्रांसलेट हुआ तो हिंदी के कठिन शब्द सामने आ गए, जो ना तो स्टेनोग्राफर को समझ आ रहे थे और ना ही वकील को।
20-30 मिनट में टाइप होने वाला ऑर्डर 4 घंटे में बना
जब स्टेनोग्राफर और वकील दोनों ही उन शब्दों को समझ नहीं पा रहे थे, तो उन्होंने उनके बदले कुछ सरल शब्दों का चयन करने के लिए मशक्कत शुरू की। यही कारण रहा कि 20-30 मिनट में तैयार होने वाला ऑर्डर करीब 4 घंटे में जाकर तैयार हुआ। इसके बाद भी ऑर्डर में ऐसे कई शब्द थे, जिन्हें समझना काफी मुश्किल था। एडवोकेट का दावा है कि जिस पुरुष और महिला का केस था, उन्हें भी हिंदी का यह आदेश समझ नहीं आया।

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