बलिया में हिंदू और मुस्लिम मिलकर मनाते हैं पर्व, दीपों से जगमगाएंगे दोनों के धार्मिक स्थल, तैयारी पूरी

बलिया/उत्तर प्रदेश। बलिया जिला का नाम हमेशा से चर्चा में रहा है। आजादी की लड़ाई हो या राजनीतिक पहचान हो, एकता का संदेश हो कहीं न कहीं अग्रणी भूमिका रहती है। देश भर में दिवाली का त्यौहार बड़े ही उमंग के साथ मनाया जा रहा है। वहीं, जिले के अखार ग्राम सभा का पूरवा दादा के छपरा गांव मिसाल कायम करते जा रहा है। यहां 1988 में मजार और 1990 में एक ही जगह मंदिर बना। इसी के बलग में 2016 में बना मस्जिद भी मौजूद है। दोनों धार्मिक स्थलों के पुजारी और मौलवी का कहना है कि हम लोगों में कोई अंतर नहीं है। दोनों जगह एक ही भगवान की पूजा होती है। इतना ही नहीं हरेक पर्व और शादी विवाह में भी एक दूसरे के साथ मिलकर सहयोग लेते- देते हैं।
बलिया के इस गांव से पूरे भारत वर्ष में एकता का संदेश दिया जाता है। बलिया के सदर तहसील अंतर्गत अखार ग्राम सभा के दादा के छपरा गांव का अनूठा परिचय है। यहां दक्षिणेश्वर नाथ महादेव मंदिर, मजार तथा मस्जिद एक ही जगह बना हुआ है। मजार पर उर्स मेला का आयोजन होता है तो इस विशाल मेले का नेतृत्व हिंदू भाई करते हैं।वहीं महाशिवरात्रि का महापर्व हो या दक्षिणेश्वर नाथ महादेव मंदिर का वार्षिकोत्सव हो, इसमें मुस्लिम बन्धु बढ़- चढ़कर सहयोग करते हैं। शादी ,विवाह हो या कोई आयोजन इतना प्रेम रहता है की समझना मुश्किल हो जाता है। हिंदू भाई के घर के मांगलिक कार्यक्रम में मुस्लिम बन्धु तथा मुस्लिम बन्धुओं के मांगलिक कार्यक्रम में हिंदू भाई ऐसे शामिल होते हैं,जैसे उनके घर का ही उत्सव है।यदि किसी मुस्लिम के यहां मौत होती है तो हिंदू धर्म के लोग कब्रगाह तक तथा मुस्लिम बन्धु श्मशान तक जाते हैं।
एक तरफ होती है आरती, दूसरी तरफ आजान
दादा के छपरा गांव में स्थित मन्दिर में आरती तो मस्जिद में आजान भी एक साथ होता है।। मन्दिर पर लगे लाउड स्पीकर माध्यम से जब भजन होता है और आजान का समय होता है तो मन्दिर का भजन बन्द नहीं होता। मस्जिद का आजान और मन्दिर का भजन सुर एक साथ होता है। अखार ग्राम सभा के दादा के छपरा गांव में 23 अक्टूवर 1988 को बाबा चुप शाह वारसी का मजार बना था। मजार के पास ही 2 नवम्बर 1990 को दक्षिणेश्वर नाथ महादेव का मंदिर बनाया गया। 3 मई 2016 को इसी जगह मस्जिद भी बनकर तैयार हो गया। उसके बाद से एकता,सद्भाव का संदेश दिख रहा है।
हिंदू और मुस्लिम परिवार रहते हैं साथ
हिंदू ,मुस्लिम का प्रेम अगर है तो एक बार बलिया चले आइये। दादा के छपरा गांव में लगभग 100 परिवार हिन्दू और करीब 24 परिवार मुस्लिम हैं। आपसी प्रेम, सद्भाव को देखकर निश्चित ही आप चौंक जाएंगे। गांव में हिन्दू, मुस्लिम बन्धुओं के बीच स्नेह इतना है कि कोई एक दूसरे का शिकायत नहीं सुनना चाहता। मन्दिर के पुजारी रिटायर्ड फौजी ओम प्रकाश राय का कहना है कि मंदिर में भगवान की सेवा करता हूं। रही बात मजहब की तो हमारे दोनों के मजहब की तो आप की नजरों में अलग है। मेरे लिए तो दोनों एक ही है।
ओम प्रकाश राय कहते हैं कि जितना सम्मान हम अपने शंकर जी को करते हैं। उससे कम सम्मान हम मजार, मस्जिद को नहीं करते हैं। हमारे यहां कोई त्यौहार होता है तो पूर्ण सहयोग में ये रहते हैं। इनके यहां कोई त्यौहार होता है तो उसमें हम लोग रहते हैं। मतलब, हम लोगों के अन्दर कोई ऐसी भावना नहीं है। हम लोग प्रेम से करते हैं। किसी की कोई मजबूरी नहीं होती, बस आपस का प्रेम है।
इंसानियत के धर्म को मानते हैं हम
मस्जिद के पेशे इमाम ने कहा कि हम लोग आपस में मिलकर हर काम करते हैं। मंदिर का काम होगा, मुस्लिम मिलेंगे। मस्जिद- मजार का काम होगा, हिन्दू मिलेंगे। हिन्दू- मुसलमान के बीच पर्वों को मनाने को लेकर कोई अंतर नहीं है, हम लोग मिलजुल कर पर्व मनाते हैं। ग्रामीण सतीश कुमार राय ने कहा कि इस गांव की बात की जाए तो यह गांव आज के इस माहौल में जब देश में धर्म के नाम पर बहुत सारे विवाद चल रहे हैं, हमारा गांव एक उदाहरण है।
सतीश कहते हैं कि इस गांव की मिसाल को लेकर बहुत सारे लोग धर्म के नाम पर लड़ना,धर्म के नाम पर बंटना, सब छोड़ेंगे। ये हम लोगों का निश्चय है। हमारे खून का रंग एक है। जब ऊपर वाले ने नहीं बांटा, तो हम अपने आपको बांटने में भरोसा नहीं रखते। हम इंसानियत का धर्म मानते हैं और आगे मानते रहेंगे।

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