41 हजार में रेलवे ने पकड़ा एक चूहा, आरटीआई में हुआ खुलाशा

नीमच/मध्‍य प्रदेश। नीमच के एक आरटीआई एक्टिविस्‍ट ने सूचना के आधिकार के रेलवे की जानकारी निकाली, जिसमें सामने आया कि रेलवे ने चूहों को पकड़ने के लिए तीन साल में 69 लाख रुपए की रकम खर्च की। इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि चूहे कितने नुकसानदायक हो सकते है। दरअसल, नीमच के रहने वाले आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने चूहा पकड़ने के लिए रेलवे द्वारा खर्च की गई राशि की जानकारी मांगी थी। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में बड़ी बात निकलकर सामने आई है। उत्तर रेलवे में 5 मंडल हैं। दिल्ली, अंबाला, लखनऊ, फिरोजपुर और मुरादाबाद। इन सभी मंडलों ने चूहा पकड़ने पर हुए खर्च की जानकारी दी।
41 हजार में पकड़ा एक चूहा
नीमच के चंद्रशेखर गौड़ को साझा की है। हालांकि लखनऊ मंडल रेलवे के पास यह जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं है कि चूहों की वजह से रेलवे को कितना नुकसान हुआ, लेकिन 69 लाख रुपये खर्च कर महज 168 चूहों को पकड़ने वाली रेलवे की बात पर लोग तरह-तरह की चर्चा कर रहे हैं। जो नीमच से लेकर देश में अब सुर्खियों में है।
चूहों का आतंक सिर्फ घरों में ही नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्थानों से लेकर सरकारी कार्यालयों तक है। चूहों की वजह से होने वाले नुकसान से बचने के लिए लोग तरह-तरह के उपाय करते हैं, और कम खर्च में इनसे छुटकारा पाने की कोशिश करते है। बाजार में चूहों से छुटकारा पाने के कई प्रोडक्ट उपलब्ध है, लेकिन आरटीआई के खुलासे के बाद चूहों से ही जुड़ा यह हैरान करने वाला मामला देश में सुर्खियों में है।
प्रतिवर्ष रेलवे ने 23 लाख से ज्यादा खर्च किए
जी हां उत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल ने एक चूहे को पकड़ने में 41 हजार रुपये खर्च कर दिए। लखनऊ मंडल रेलवे ने चूहों को पकड़ने के लिए 69 लाख रुपये खर्च किए हैं। जानकर हैरानी होगी कि 69 लाख की बड़ी रकम सिर्फ 168 चूहों को पकड़ने में खर्च कर दी। आरटीई रिपोर्ट के मुताबिक यह रकम पिछले तीन सालों में खर्च की गई। यानी प्रतिवर्ष उत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल ने चूहों को पकड़ने पर 23 लाख रुपये से ज्यादा खर्च किए। खुलासे के बाद अब रेलवे विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।

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