हिमाचल में घर पर मंजवाए बर्तन, मना करने पर नौकरी से हटाया,महिला आईएएस पर एनएचएम कर्मचारियों ने लगाए आरोप

शिमला,(एजेंसी)। हिमाचल प्रदेश सरकार अफसरशाही को लेकर सवालों के घेरे में आती रहती है लेकिन अब तो अफसरशाही तानाशाही भी दिखाने लगी है। तानाशाही भी ऐसी की तीन मजबूर कर्मचारियों की नौकरी चली गई। हम बात कर रहे हैं हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग की सचिव एम सुधा देवी की। जिन पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत आउटपुट पर काम करने वाले 3 कर्मचारियों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें स्वास्थ्य सचिव ने अपने घर पर काम करने के लिए कहा गया। जबकि उन्हें एनएचएम से प्रदेश सचिवालय में स्वास्थ्य सचिव के कार्यालय में काम करने के लिए भेजा गया है। लेकिन स्वास्थ्य सचिव ने उन तीन कर्मचारियों को कार्यालय की जगह अपने घर में जाकर काम करने के लिए बाध्य किया।
बात बस इतनी नहीं है, 3 कर्मचारियों में से एक महिला भी है जो दिव्यांग है। नीना ठाकुर नाम की इस कर्मचारी ने जब सचिव के घर में काम करने की टाइमिंग को लेकर कहा कि वह देर तक उनके घर पर काम करने के लिए नहीं रुक सकती है। तो स्वास्थ्य सचिव ने उसे दूसरी नौकरी ढूंढने की बात कही। मीना ठाकुर ने जानकारी देते हुए बताया कि वह दिव्यांग है और उनके दोनों हाथों में लोहे की रॉड पड़ी हुई है। इसीलिए वह भारी काम नहीं कर सकती है। झाड़ू पोछा और कपड़े धोना इस तरह के काम नहीं कर सकती। लेकिन स्वास्थ्य सचिव को ना सुनना गवारा नहीं आया।
रीना ठाकुर का कहना है कि सचिव सुधा देवी ने उसे यह भी कहा कि वह रात को 8 बजे तक उसके घर पर काम करें और उसके बाद अपने घर जाए। मीना ठाकुर शिमला से करीब 33 किलोमीटर दूर रहती है। रात के समय में उनके लिए यहां से वापस घर जाना संभव नहीं है। जब मीना ने स्वास्थ्य सचिव से यह तक कहा कि उनके घर का काम करने के लिए तैयार है, लेकिन वह रात को उनके रुकने का इंतजाम करें तो इस पर स्वास्थ्य सचिव ने कहा की उसे अपने रहने का इंतजाम खुद करना पड़ेगा। लेकिन देर रात 8 बजे तक वहां पर रुकना होगा। लेकिन नीना ने देर रात रुकने से मना कर दिया और महिला को नौकरी से निकालने की बात कही।
हर जगह से मिला आश्वासन
दो अन्य कर्मचारियों के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। एक कर्मचारी के माता-पिता काफी बीमार रहते हैं। कुछ महीनों पहले उसकी बच्ची भी अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती थी और उसने छुट्टी ली थी। लेकिन स्वास्थ्य सचिव ने यह कहा कि वह बिना पूछे ही छुट्टी पर चला गया। इसीलिए उन्हें नौकरी से निकाला जा रहा है। इन तीनों कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री स्वास्थ्य मंत्री और अन्य अधिकारियों के सामने नौकरी बचाने को लेकर गुहार लगाई। लेकिन यह कर्मचारी बस चक्कर काटते ही रह गए। सभी जगह से केवल आश्वासन ही मिला।
नौकरी से निकालने का बताया कारण
इन कर्मचारियों को नौकरी से निकालने का कारण भी यह दिया गया कि यह अपना काम अच्छे से नहीं कर पा रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि वह एनएचएम में पिछले करीब 4 सालों से काम कर रहे हैं। लेकिन आज तक उनके काम से किसी तरह की कोई शिकायत नहीं आई है। तो फिर जब उन्हें स्वास्थ्य सचिव के कार्यालय में काम करने को कहा गया तो अचानक उनके काम में खामियां विभाग को क्यों नजर आ रही है।
सभी आरोपों को नकारा
स्वास्थ्य सचिव एवं सुधा देवी ने कहा कि कर्मचारियों द्वारा लगाए जा रहे सभी आरोप निराधार है। उन्होंने कहा कि घर पर काम करने के लिए उनके पास लोग हैं तो फिर वो इन कर्मचारियों को अपने घर पर काम करने के लिए क्यों भेजेंगे। स्वास्थ्य सचिव ने आरोप लगाते हुए कहा कि इनमें से एक कर्मचारी करीब 40 दिन तक बिना बताए छुट्टी पर था और पूरे महीने की सैलरी भी उसे दी गई। काम में अनियमितता देखते हुए जिस कंपनी के जरिए इन कर्मचारियों को रखा गया है उस कंपनी को तीनों कर्मचारियों के काम में की जा रही अनियमितताओं के बारे में जानकारी दी गई। जरूरत पड़ी तो इन तीनों कर्मचारियों को रिप्लेस किया जाएगा।

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