मुठभेड़ में घायल लूट के आरोपी का काटना पड़ा पैर, इंफेक्शन से जा सकती थी जान

नोएडा ब्यूरो। करीब एक माह पहले बिसाहड़ा अंडरपास के पास पुलिस मुठभेड़ में घायल आरोपी का पैर काटना पड़ा। गोली लगने के बाद घायल आरोपी के पैर में इंफेक्शन हो गया था। जान बचाने के लिए ग्रेनो के अस्पताल में घुटने के पास से पैर का आधा हिस्सा काटना पड़ा। मूलरूप से बागपत निवासी अकबर को मुठभेड़ के बाद पुलिस ने दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया था। पैर में इंफेक्शन होने के बाद उसे ग्रेनो के यथार्थ अस्पताल में भर्ती कराया गया। एसीपी-2 ग्रेटर नोएडा नितिन कुमार सिंह ने बताया कि पैर मे जख्म होने पर उपचार के दौरान डॉक्टर को पैर काटना पड़ा। कोंडली-गाजियाबाद-पलवल (केजीपी) एक्सप्रेसवे पर 16 जून को मायचा गांव के पास चालक कृष्ण ने ट्रक को लघुशंका के लिए रोका था। कार सवार बदमाशों ने स्वयं को पुलिस बताकर चालक को अपनी कार में बैठा लिया।
नशीला इंजेक्शन लगाकर चालक को बेहोश करने के बाद बदमाश गाजियाबाद के दुहाई के पास 10 लाख रुपये कीमत के लोहे की प्लेट से भरा ट्रक लूटकर फरार हो गए। आरोपियों ने माल से भरा ट्रक दादरी रेलवे रोड पर लोहे के व्यापारी को 7 लाख रुपये मे बेच दिया था।
28 जून को लोहे के व्यापारी से रुपये लेने के लिए आरोपी कार से दादरी जा रहे थे। इससे पहले बिसाहड़ा अंडरपास के पास हुई पुलिस मुठभेड़ में बागपत निवासी अकबर और कुलदीप के पैर में गोली लग गई। पुलिस ने आरोपियों को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। आरोपी अकबर का कहना है कि दिल्ली के अस्पताल में उचित देखभाल नहीं होने से उसके पैर में इंफेक्शन हो गया। आरोपी की जान पर बन आने के बाद उसे यथार्थ अस्पताल में भर्ती कराया गया।

वर्ष 2016 में बीटा-2 थाना पुलिस से मुठभेड़ में लूट के आरोपी के पैर में गोली लगी थी। हालत बिगड़ने से उसका पैर काटना पड़ा था। वहीं, 2020 में भी दादरी क्षेत्र में एक आरोपी के पैर में गोली लगी थी। बाद में नोएडा के एक अस्पताल में हुए उपचार के बाद उसकी जान बच सकी थी।
पैर की मुख्य धमनी फटने से उत्पन्न होती है समस्या
पैरों में रक्त का संचार करने वाली मुख्य धमनियां (नस) होती हैं। ऐसे में यदि गोली लगने से मुख्य धमनी फट जाती है। इसका ठीक से उपचार न होने पर रक्त का संचार ठीक नहीं होता तो नीचे का पैर सड़ने लगता है। ऐसे में मरीज की जान भी जा सकती है। जान बचाने के लिए मरीज का पैर काटना पड़ता है। -डॉ. ब्रजेश कुमार, हड्डी रोग विशेषज्ञ

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