जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में में बाल गृह के बच्चों की हुनरमंदी का दिखा हुनर, हस्तनिर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी ने खींचा ध्यान
धनतेरस और दीपावली के अवसर पर जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में बाल गृह के बच्चों द्वारा हस्तनिर्मित मिट्टी के दीये, कुल्हड़, पेंटिंग और मुखौटों की प्रदर्शनी-सह-विक्रय आयोजित किया गया।

सुमिता शर्मा/जिला ब्यूरो चीफ
अनूपपुर,मध्य प्रदेश। धनतेरस और दीपावली के अवसर पर बाल गृह के बच्चों को स्वावलंबी बनाने तथा उनकी रचनात्मक प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में हस्तनिर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी-सह-विक्रय का आयोजन किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अनूपपुर के सचिव एवं जिला न्यायाधीश मनीष कुमार पाटीदार के मार्गदर्शन में आयोजित इस पहल में बाल गृह के बच्चों ने अपने हाथों से तैयार की गई आकर्षक सामग्री प्रदर्शित की। बच्चों की मेहनत और हुनर से तैयार मिट्टी के दीये, कुल्हड़, पेंटिंग और मुखौटे लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे।
प्रदर्शनी का शुभारंभ मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रीमती चैनवती ताराम एवं न्यायाधीश रावेन्द्र कुमार सोनी की उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और न्यायालय परिसर में मौजूद नागरिकों ने बच्चों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों का अवलोकन किया और उनकी कला की सराहना की। कई लोगों ने प्रदर्शनी से हस्तनिर्मित वस्तुओं की खरीदारी भी की। इससे बच्चों को अपने हुनर का सम्मान मिलने के साथ-साथ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ने का प्रोत्साहन मिला।
इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य बच्चों को केवल रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना ही नहीं, बल्कि उन्हें कौशल विकास और स्वरोजगार की संभावनाओं से भी परिचित कराना था। बच्चों द्वारा मिट्टी और अन्य सामग्री से तैयार किए गए उत्पादों ने उनकी मेहनत, कल्पनाशीलता और सीखने की क्षमता को प्रदर्शित किया। खरीदारों की उत्साहपूर्ण भागीदारी से बच्चों का आत्मविश्वास भी बढ़ा।
महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती संजीता भगत के नेतृत्व में बाल गृह के बच्चों को स्वरोजगार से संबंधित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस तरह के प्रशिक्षण और प्रदर्शनी के माध्यम से बच्चों को अपने हुनर को उपयोगी उत्पादों में बदलने तथा भविष्य में आत्मनिर्भर बनने के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
कार्यक्रम में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रीमती चैनवती ताराम, न्यायाधीश श्री रावेन्द्र कुमार सोनी, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष श्री मोहनलाल पटेल, जिला कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती संजीता भगत एवं सहायक संचालक श्रीमती मंजूषा शर्मा उपस्थित रहे। आयोजन ने यह संदेश दिया कि उचित मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और प्रोत्साहन मिलने पर बच्चे अपनी प्रतिभा के दम पर आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ सकते हैं।



