कानपुर में विकास कार्यों की अनदेखी से नाराज भाजपा पार्षद ने नगर निगम में उस्तरे से काटी हाथ की नस, मची अफरा-तफरी
भाजपा के बागी पार्षद पवन गुप्ता ने नगर निगम मुख्यालय पर आत्महत्या का प्रयास किया। उन्होंने मुख्य अभियंता आलोक श्रीवास्तव से बहस के बाद उस्तरा निकाला। इस दौरान वहां अफरा-तफरी मच गई और अन्य पार्षदों ने उन्हें रोका। पार्षदों ने विकास कार्यों में अनदेखी और क्षेत्र की समस्याओं का उल्लेख किया।

कानपुर,उत्तर प्रदेश। कानपुर नगर निगम में विकास कार्यों को लेकर जनप्रतिनिधियों की नाराजगी सोमवार को उस समय गंभीर स्थिति में पहुंच गई, जब वार्ड-37 अशोक नगर के भाजपा के बागी पार्षद पवन गुप्ता ने मोतीझील स्थित नगर निगम मुख्यालय में कथित तौर पर खुद को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया। क्षेत्र में विकास कार्य नहीं होने से नाराज पार्षद की मुख्य अभियंता आलोक श्रीवास्तव से बहस हो गई थी। इसी विवाद के बाद उन्होंने अपनी जेब से उस्तरा निकाल लिया और आत्मघाती कदम उठाने की कोशिश की। मौके पर मौजूद साथी पार्षदों ने उन्हें रोक लिया। घटना से नगर निगम परिसर में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई।
बताया जा रहा है कि पवन गुप्ता अपने वार्ड में विकास कार्यों की कथित अनदेखी और संबंधित फाइलों पर कार्रवाई नहीं होने से नाराज थे। सोमवार को वह इसी मुद्दे को लेकर नगर निगम मुख्यालय पहुंचे थे। वहां मुख्य अभियंता आलोक श्रीवास्तव से बातचीत के दौरान दोनों के बीच तीखी बहस हो गई। विवाद बढ़ने पर पार्षद ने गुस्से में खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की। हालांकि, मौके पर मौजूद अन्य पार्षदों ने हस्तक्षेप कर उन्हें रोक लिया।
घटना के बाद पार्षदों ने नगर निगम अधिकारियों पर विकास कार्यों से जुड़ी फाइलें लंबित रखने और जनता की समस्याओं पर उचित ध्यान नहीं देने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि क्षेत्र में विकास कार्य नहीं होने से उन्हें लगातार स्थानीय लोगों के सवालों का सामना करना पड़ रहा है। अधिकारियों के सामने बार-बार मांग रखने के बावजूद समाधान नहीं होने से जनप्रतिनिधियों में नाराजगी बढ़ रही है।
नगर निगम में महापौर प्रमिला पांडेय और कुछ भाजपा पार्षदों के बीच पहले से ही तनातनी की चर्चा रही है। विकास कार्यों में कथित भेदभाव और वार्डों की समस्याओं को लेकर पांच भाजपा पार्षदों ने भी महापौर के खिलाफ नाराजगी जताई है। सोमवार की घटना ने नगर निगम प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच चल रहे मतभेद को फिर चर्चा में ला दिया है।
इस पूरे घटनाक्रम ने नगर निगम की कार्यप्रणाली और जनप्रतिनिधियों की शिकायतों के निस्तारण को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, विकास कार्यों की फाइलें लंबित होने और अधिकारियों की कथित अनदेखी के आरोपों पर संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। अब देखना होगा कि नगर निगम प्रशासन पार्षदों की शिकायतों पर क्या कार्रवाई करता है और वार्डों में लंबित विकास कार्यों को लेकर कोई ठोस पहल होती है या नहीं।




