दिल्ली में पुलिस-वकील विवाद सुलझा, एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और एसएचओ अरुण कुमार के तबादले के बाद वकीलों की हड़ताल खत्म
दिल्ली में एसीपी और शाहदरा थाने के एसएचओ अरुण कुमार के तबादले के बाद जिला अदालतों में वकीलों की अनिश्चितकालीन हड़ताल खत्म हो गई है। बैठक में पुलिसकर्मियों के खिलाफ शिकायतों की जांच दो महीने और वकीलों के खिलाफ दर्ज एफआईआर की जांच एक हफ्ते में पूरी करने पर सहमति बनी है।

नई दिल्ली। दिल्ली की जिला अदालतों में वकीलों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के बीच दिल्ली पुलिस ने बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। शाहदरा जिले में तैनात एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा थाने के एसएचओ इंस्पेक्टर अरुण कुमार का तबादला कर दिया गया है। एसीपी मनस्वी वशिष्ठ को स्पेशल पुलिस यूनिट फॉर वुमन एंड चिल्ड्रेन में भेजा गया है, जबकि इंस्पेक्टर अरुण कुमार को सिक्योरिटी शाखा में तैनात किया गया है। दोनों अधिकारियों को निलंबित करने की मांग को लेकर वकील आंदोलन कर रहे थे। अधिकारियों के तबादले के बाद दिल्ली की सभी जिला अदालतों में वकीलों ने हड़ताल तत्काल वापस लेने का निर्णय लिया। हालांकि, दिल्ली पुलिस इन तबादलों को नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बता रही है।
कड़कड़डूमा अदालत के अधिवक्ता ललित बंसल पर पार्किंग विवाद के दौरान कुछ लोगों ने कथित तौर पर हमला कर दिया था, जिसमें उन्हें काफी चोटें आई थीं। इस घटना के बाद वकीलों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। वकीलों का आरोप था कि मामला दर्ज होने और आरोपियों को पकड़े जाने के बावजूद रिश्वत लेकर उन्हें छोड़ दिया गया। इसी मुद्दे को लेकर वकीलों में नाराजगी बढ़ गई और उन्होंने संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग शुरू कर दी।
विरोध के दौरान करीब 15 से 20 वकील शाहदरा थाने में एसएचओ के कमरे तक पहुंच गए, जहां काफी गहमागहमी और हंगामा हुआ। इसके बाद 26 अक्टूबर को एसीपी गांधी नगर मनस्वी वशिष्ठ की शिकायत पर वकीलों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। इस कार्रवाई ने विवाद को और बढ़ा दिया तथा वकीलों ने एसीपी और एसएचओ को निलंबित करने की मांग करते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी। वकीलों का कहना था कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
मामले को सुलझाने के लिए दिल्ली पुलिस, बार काउंसिल ऑफ दिल्ली और विभिन्न बार एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों के बीच बैठक हुई। इसके बाद दिल्ली पुलिस मुख्यालय ने 28 अक्टूबर को दोनों अधिकारियों के तबादले के आदेश जारी किए। आदेश के अनुसार, गांधी नगर के उपमंडल पुलिस अधिकारी के पद पर तैनात एसीपी मनस्वी वशिष्ठ को स्पेशल पुलिस यूनिट फॉर वुमन एंड चिल्ड्रेन में स्थानांतरित किया गया, जबकि शाहदरा थाने के एसएचओ इंस्पेक्टर अरुण कुमार को सिक्योरिटी शाखा में भेज दिया गया।
बैठक में पुलिसकर्मियों और वकीलों के खिलाफ दर्ज मामलों की जांच को लेकर भी सहमति बनी। शाहदरा बार एसोसिएशन के सदस्यों की ओर से पुलिसकर्मियों के खिलाफ दी गई शिकायतों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करने पर सहमति जताई गई। वहीं, शाहदरा थाने में दर्ज प्राथमिकी संख्या 248/2026 में नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए तत्काल कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया। यदि आरोपी गिरफ्तार नहीं होते हैं तो उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कराने और आवश्यक परिस्थितियों में लुकआउट सर्कुलर जैसी कानूनी प्रक्रिया अपनाने पर भी सहमति बनी।
इसके अतिरिक्त, वकीलों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी संख्या 252/2026 की जांच एक सप्ताह के भीतर पूरी करने का निर्णय लिया गया। इस सहमति के बाद जिला अदालतों की सभी बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति ने हड़ताल तत्काल समाप्त करने की घोषणा की और वकीलों से न्यायिक कार्य में लौटने की अपील की।
हड़ताल का असर दिल्ली की जिला अदालतों के न्यायिक कामकाज पर भी पड़ा था। कई महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई और आदेश प्रभावित हुए। इस दौरान न्यायिक अधिकारियों और न्यायाधीशों ने अदालतों का कामकाज सुचारू बनाए रखने के लिए सहयोग किया। पुलिस अधिकारियों के तबादले, लंबित शिकायतों की जांच के लिए समयसीमा तय होने और संबंधित मामलों में कार्रवाई पर सहमति बनने के बाद अब अदालतों में सामान्य कामकाज बहाल होने की उम्मीद है।
इस घटनाक्रम ने पुलिस और वकीलों के बीच बेहतर समन्वय, शिकायतों की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता को एक बार फिर सामने ला दिया है। हालांकि, पूरे मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगी। फिलहाल, हड़ताल समाप्त होने के बाद न्यायिक कार्यवाही सामान्य रूप से आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है।




