यूपी में प्रशासन के दावों की खुली पोल, जान जोखिम में डालकर नहर के बीच से होकर जाना पड़ता है स्कूल

बदायूं के कासू नगला में स्कूल नहीं होने से 200 से ज्यादा बच्चों को दो किमी दूर पढ़ने जाना पड़ता है। बरसात में ग्रामीण उन्हें कंधों पर बैठाकर गहरी नहर पार कराते हैं।

बदायूं,उत्तर प्रदेश। जिले के दातागंज विकास क्षेत्र के कासू नगला गांव में बच्चों की पढ़ाई का सफर आज भी जोखिम भरा बना हुआ है। गांव में प्राथमिक विद्यालय नहीं होने के कारण बच्चों को करीब दो किलोमीटर दूर दूसरे गांव स्थित स्कूल जाना पड़ता है। रास्ते में दो गहरी नहरें पड़ती हैं, जिन पर सुरक्षित पुल या आवागमन की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण बरसात के दिनों में बच्चों को कंधों पर बैठाकर या गोद में लेकर नहर पार कराने की तस्वीर सामने आती है।
सुबह के समय जब बच्चों के कंधों पर स्कूल का बस्ता होना चाहिए, उस समय कासू नगला में कई बार अभिभावक बच्चों को कंधे पर बैठाकर गहरे पानी से गुजरते दिखाई देते हैं। नहरों में पानी बढ़ने के बाद बच्चों का अकेले रास्ता तय करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में ग्रामीण उन्हें सुरक्षित तरीके से दूसरी ओर पहुंचाने की कोशिश करते हैं।
नहर पार करने के बाद भी बच्चों की मुश्किल खत्म नहीं होती। उन्हें खेतों की मेड़ों और झाड़ियों के बीच से होकर स्कूल तक जाना पड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार, कुछ स्थानों पर खेतों की मेड़ों के किनारे ब्लेड वाला तार भी लगा है, जिससे बच्चों के लिए रास्ता और जोखिम भरा हो जाता है।
ग्रामीणों के मुताबिक कासू नगला की आबादी करीब 750 से 800 है और यहां 200 से अधिक बच्चे स्कूल जाने की उम्र के हैं। इसके बावजूद गांव में अब तक प्राथमिक विद्यालय नहीं बन सका है। ग्रामीणों का दावा है कि गांव की करीब 80 प्रतिशत आबादी अशिक्षित है और कई पीढ़ियां शिक्षा से दूर रही हैं।
ग्रामीणों ने विद्यालय निर्माण की मांग को लेकर स्थानीय विधायक से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक गुहार लगाने की बात कही है। उनके अनुसार, विधायक की पहल पर उपजिलाधिकारी ने खंड शिक्षा अधिकारी से गांव में विद्यालय की आवश्यकता को लेकर जांच कराई थी। जांच रिपोर्ट जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी और जिलाधिकारी को भेजे जाने की बात भी ग्रामीणों ने कही है। ग्रामीणों का दावा है कि जिलाधिकारी स्तर से भी विद्यालय निर्माण के लिए संस्तुति की गई, लेकिन इसके बाद भी मामला आगे नहीं बढ़ सका।
यहीं से प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल खड़ा होता है। जब गांव में सैकड़ों बच्चे हैं, विद्यालय की आवश्यकता को लेकर जांच हो चुकी है और ग्रामीण लगातार मांग उठा रहे हैं, तो अब तक स्कूल क्यों नहीं बन सका? क्या बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा के लिए किसी गंभीर हादसे का इंतजार किया जा रहा है? बरसात में बच्चों को कंधों पर बैठाकर नहर पार कराने की स्थिति सामने आने के बावजूद जिम्मेदार विभागों की ओर से स्थायी समाधान क्यों नहीं किया गया, यह सवाल प्रशासन के सामने है।
कासू नगला के बच्चों के लिए शिक्षा तक पहुंच का रास्ता केवल दूरी का नहीं, बल्कि सुरक्षा का भी सवाल बन गया है। एक तरफ गहरी नहरें हैं तो दूसरी तरफ खेतों की मेड़ और झाड़ियों के बीच से गुजरने की मजबूरी। ऐसे में प्रशासन के उन दावों पर भी सवाल उठ रहे हैं, जिनमें हर बच्चे तक सुरक्षित और सुलभ शिक्षा पहुंचाने की बात कही जाती है। ग्रामीण अब जानना चाहते हैं कि कासू नगला में प्राथमिक विद्यालय कब बनेगा और बच्चों को इस जोखिम भरे सफर से कब निजात मिलेगी।

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