जातीय भेदभाव पर रामदेव की चिंता, बोले- ‘देश में कहीं गृहयुद्ध की स्थिति न पैदा हो जाए’
स्वामी रामदेव ने सवर्ण और अन्य जातियों के बीच बढ़ती खाई पर गहरा असंतोष जताया है। उन्होंने किसी भी कानून के एकतरफा न बनाए जाने की बात कही।

हरिद्वार,उत्तराखंड। योगगुरु स्वामी रामदेव ने जातीय भेदभाव को लेकर चिंता जताते हुए कहा है कि समाज के विभिन्न वर्गों के बीच बढ़ती दूरी को कम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति या समुदाय के साथ जाति के आधार पर प्रताड़ना नहीं होनी चाहिए और कानूनों का इस्तेमाल किसी एक वर्ग के खिलाफ होने की धारणा पैदा नहीं करनी चाहिए। रामदेव ने आशंका जताई कि यदि जातीय विभाजन और तनाव बढ़ता रहा तो देश में गृहयुद्ध जैसी स्थिति पैदा होने का खतरा हो सकता है।
रामदेव ने कहा कि सवर्ण समाज और पिछड़े, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा आदिवासी समुदायों के बीच दूरियां बढ़ना चिंता का विषय है। उन्होंने संविधान में समानता के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज में जातीय पहचान के आधार पर भेदभाव और आपसी दूरी कम करने के प्रयास किए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि शिक्षा और रोजगार से जुड़े अवसरों में जाति आधारित व्यवस्थाओं को लेकर समाज में अलग-अलग विचार हैं। उनके अनुसार, बच्चों और युवाओं के बीच जाति तथा वर्ग के आधार पर घृणा या नफरत की भावना पैदा नहीं होनी चाहिए। सामाजिक समरसता के लिए सभी समुदायों के सम्मान पर समान रूप से जोर दिए जाने की जरूरत है। हालिया सार्वजनिक बयानों में भी रामदेव ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और आदिवासी समुदायों के साथ-साथ ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य समुदायों के समान सम्मान की बात कही है।
रामदेव ने कहा कि जाति के आधार पर किसी सवर्ण, पिछड़े, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या आदिवासी व्यक्ति की प्रताड़ना नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस विषय पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है, ताकि कानून और व्यवस्था को लेकर किसी वर्ग में अन्याय या भेदभाव की भावना न बने।
उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब देश के विभिन्न हिस्सों में जाति आधारित आरक्षण और शैक्षणिक संस्थानों में भेदभाव से जुड़े मुद्दों पर बहस और विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। हाल में दिल्ली में आरक्षण विरोधी प्रदर्शन से जुड़े एक मामले में उच्च न्यायालय ने भी विरोध प्रदर्शनों पर व्यापक प्रतिबंध लगाए जाने को लेकर पुलिस से सवाल किया था।
रामदेव ने अपने बयान में सामाजिक विभाजन कम करने, सभी समुदायों के सम्मान और आपसी संवाद पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सामाजिक व्यवस्था में किसी भी वर्ग के साथ अन्याय या प्रताड़ना की स्थिति उत्पन्न न हो, इसके लिए कानून, प्रशासन और समाज सभी स्तरों पर संतुलित दृष्टिकोण जरूरी है।




