कानपुर में ऑटो चालक के नाम पर 80 लाख का ऋण कराने का आरोप,जीएसटी अफसर समेत नौ के खिलाफ मामला दर्ज

कानपुर में ऑटो वाले के नाम पर 80 लाख रुपये का लोन लिए जाने का मामला सामने आया है। बैंक का नोटिस मिलने पर फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।

कानपुर,उत्तर प्रदेश। कानपुर में एक ऑटो चालक के नाम पर कथित तौर पर 80 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत कराए जाने का मामला सामने आया है। पीड़ित को बैंक से ऋण संबंधी नोटिस मिलने के बाद कथित फर्जीवाड़े का पता चला। उसकी शिकायत पर पुलिस आयुक्त के निर्देश से बैंक अधिकारी समेत नौ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई है।
विनायकपुर निवासी ऑटो चालक शिवम शुक्ला का आरोप है कि सितंबर 2024 में राहुल ओझा, ज्ञानेंद्र विश्वकर्मा और अर्पित ने खुद को चार्टर्ड अकाउंटेंट बताकर उसे नौकरी पर रखा था। आरोप है कि राहुल ओझा ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना के तहत 10 लाख रुपये का ऋण दिलाने का भरोसा देकर शिवम से विभिन्न दस्तावेज लिए। बाद में उन्हीं दस्तावेजों का कथित रूप से इस्तेमाल कर उसके नाम पर ‘शिवम ट्रेडर्स’ नाम से फर्म बनाई गई और राइस मिल के लिए 80 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत कराया गया।
शिवम का आरोप है कि इस प्रक्रिया में इंडियन बैंक के प्रबंधक कुमार पवन और कथित रूप से वंदना मिश्रा की भी भूमिका रही। पुलिस ने दर्ज मामले में बैंक प्रबंधक कुमार पवन, सहायक महाप्रबंधक आनंद गौरव, वंदना मिश्रा, राहुल ओझा, ज्ञानेंद्र विश्वकर्मा, प्रवीण कुशवाहा, शिवानी कुशवाहा, अंकित शुक्ला और रक्षा गुप्ता को आरोपी बनाया है। मामले में आरोपों की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है और किसी आरोपी की भूमिका अभी न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हुई है।
पीड़ित के अनुसार, करीब नौ महीने बाद बैंक से ऋण संबंधी नोटिस मिलने पर उसे पता चला कि उसके नाम पर 80 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हो चुका है। उसका कहना है कि उसे केवल 5 से 10 लाख रुपये तक का ऋण दिलाने की बात कही गई थी। आरोप है कि बाद में उसके दस्तावेजों के आधार पर फर्म का पंजीकरण कराया गया और ऋण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
मामले में बैंक की ऋण स्वीकृति प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायत के अनुसार, ऋण स्वीकृत करने से पहले प्रस्तावित राइस मिल की जमीन का कथित तौर पर भौतिक सत्यापन नहीं किया गया और न ही फर्म के नाम पर प्रस्तुत संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों का पर्याप्त सत्यापन किया गया। पुलिस इन आरोपों और ऋण स्वीकृति की पूरी प्रक्रिया की जांच कर रही है।
शिवम का यह भी आरोप है कि उसे अन्य लोगों के ऋण संबंधी आवेदन लाने के लिए कहा गया था और प्रत्येक फाइल के बदले 20 हजार रुपये देने का भरोसा दिया गया था। उसके अनुसार उसने कई लोगों के खाते खुलवाए और बाद में आरोपियों के संपर्क में रहा। इसी दौरान उसे बैंक अधिकारियों से मिलवाया गया तथा उसके नाम पर फर्म पंजीकृत कराई गई।
शिकायत में एक मृत परिजन के दस्तावेजों के कथित दुरुपयोग का भी आरोप लगाया गया है। शिवम का आरोप है कि उसकी मां की वर्ष 2019 में मृत्यु हो चुकी थी, इसके बावजूद वर्ष 2024 में उनके नाम से हस्ताक्षर वाले दस्तावेज तैयार कर फर्म के पंजीकरण में इस्तेमाल किए गए। इन आरोपों की भी पुलिस जांच कर रही है।
पुलिस आयुक्त के निर्देश पर मामले की जांच के साथ आरोपियों की भूमिका और संभावित वित्तीय लेन-देन की पड़ताल की जा रही है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बैंक अधिकारियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ तथा दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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