हिमाचल के चंबा में कैस्पियन कोबरा की मौजूदगी दर्ज, काटने के आधे घंटे के भीतर मौत,चंबा में दो बने शिकार
सेंट्रल एशिया के बेहद खतरनाक सांपों में शामिल कैस्पियन कोबरा की भारत में एंट्री सामने आई है। हिमाचल प्रदेश के चंबा में दो लोगों को शिकार बनाने के बाद हड़कंप मच गया है। यह सांप इतना जहरीला है कि कांटने के बाद आधे घंटे में मौत हो जाती है। इस सांप की एंट्री से दशहत देखी जा रही है।

शिमला,एजेंसी। मध्य एशिया में पाई जाने वाली कैस्पियन कोबरा प्रजाति की मौजूदगी हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में दर्ज किए जाने का मामला सामने आया है। शोधकर्ताओं के अनुसार, नाजा ऑक्सियाना के नाम से पहचानी जाने वाली इस प्रजाति की आनुवंशिक पुष्टि वर्ष 2019 में चंबा में की गई थी। एक शोध अध्ययन में इस सांप के डंसने से चंबा क्षेत्र में दो लोगों की मौत का भी उल्लेख किया गया है।
एपिडेमियोलॉजी इंटरनेशनल जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, कैस्पियन कोबरा मूल रूप से मध्य एशिया की प्रजाति है और उत्तर-पश्चिमी हिमालय में इसकी मौजूदगी के प्रमाण मिले हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि स्थानीय स्तर पर इसके कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों की ओर बढ़ने के संकेत भी मिले हैं। चंबा क्षेत्र में यह प्रजाति करीब 2,000 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाले खुले और पथरीले इलाकों में देखी गई है।
अध्ययन के अनुसार कैस्पियन कोबरा के दंश से जुड़ी पहली दर्ज मौत 6 जुलाई 2020 को हुई थी। उल्लांसा गांव का करीब 40 वर्षीय व्यक्ति सेब के बाग में दवा का छिड़काव करते समय अनजाने में सांप पर पैर रख बैठा था। सांप ने उसके पैर में दो बार डंसा। परिजनों द्वारा पहले उसे स्थानीय स्तर पर उपचार के लिए ले जाया गया और बाद में भरमौर के नागरिक अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसकी मौत हो गई।
दूसरी घटना 7 जुलाई 2021 को चुराह घाटी के भंजराड़ू गांव में सामने आई। अध्ययन के मुताबिक, करीब 62 वर्षीय व्यक्ति का पैर अनजाने में सांप पर पड़ गया था और सांप ने उसके बाएं पैर में डंस लिया। स्वास्थ्य केंद्र ले जाते समय उसकी हालत बिगड़ गई और करीब आधे घंटे के भीतर उसकी मौत हो गई।
शोध टीम के अनुसार अध्ययन के दौरान कैस्पियन कोबरा के दंश से बचने वाले दो लोगों के मामले भी सामने आए। इन दोनों का उपचार पारंपरिक जड़ी-बूटियों से किए जाने की जानकारी मिली। इनमें स्थानीय स्तर पर ‘मिर्चाड़ी’ नाम से इस्तेमाल की जाने वाली जड़ी-बूटी शामिल थी, जिसकी पहचान पेरगुलारिया डेमिया के रूप में की गई है। शोधकर्ताओं ने हालांकि जड़ी-बूटी आधारित उपचार की प्रभावशीलता का वैज्ञानिक मूल्यांकन किए जाने की आवश्यकता बताई है।
अध्ययन में कैस्पियन कोबरा की मौजूदगी को देखते हुए इसके विष के लिए उपयुक्त विषरोधी विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है। शोधकर्ताओं ने उत्तर-पश्चिमी हिमालय में इस प्रजाति के प्रसार और इससे जुड़े सर्पदंश के मामलों की निगरानी तथा वैज्ञानिक अध्ययन बढ़ाने की जरूरत बताई है। अध्ययन में यह भी उल्लेख है कि भारत में सामान्य रूप से चार प्रमुख विषैले सांपों—चश्माधारी कोबरा, रसेल वाइपर, सामान्य करैत और आरीदार शल्क वाले वाइपर—के लिए विषरोधी उपचार उपलब्ध है।




