यूजीसी रेगुलेशन के खिलाफ सवर्ण महापंचायत! करणी सेना ने रखी 10 सूत्री मांगें, 48 घंटे का दिया अल्टीमेटम
गाजियाबाद में सवर्ण महापंचायत का आयोजन किया गया। इसमें यूजीसी रेगुलेशन को वापस लिए जाने की मांग की गई। सेना ने 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है।

गाजियाबाद। यूजीसी रेगुलेशन 2026 के विरोध में रविवार को गाजियाबाद के करहेड़ा गांव में क्षत्रिय करणी सेना के नेतृत्व में सवर्ण महापंचायत का आयोजन किया गया। महापंचायत में यूजीसी रेगुलेशन 2026 को वापस लेने की मांग उठाई गई। महापंचायत के बाद प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली के जंतर-मंतर की ओर कूच करने की तैयारी की, लेकिन पुलिस ने उन्हें गांव के गेट पर ही रोक दिया। इसके बाद आक्रोशित लोग गांव के बाहर पृथ्वीराज चौहान की प्रतिमा के सामने धरने पर बैठ गए।
महापंचायत में शामिल होने पहुंचे लोगों को लेकर पुलिस और प्रशासन पहले से ही सतर्क रहा। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यूजीसी रेगुलेशन 2026 को वापस लिए जाने तक आंदोलन जारी रखा जाएगा। इससे पहले शनिवार को क्षत्रिय करणी सेना और समस्त सवर्ण समाज की ओर से करहेड़ा गांव में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नियमों को वापस लेने की मांग की गई थी।
प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, सरकार की ओर से नियमों पर दोबारा विचार किए जाने की बात सामने आने के बाद विरोध शुरू हुआ। रविवार को हुई महापंचायत में निर्णय लिया गया कि यूजीसी रेगुलेशन 2026 के रोलबैक तक जंतर-मंतर पर धरना दिया जाएगा। इसी के तहत प्रदर्शनकारी दिल्ली कूच करने की तैयारी में थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें गांव के बाहर ही रोक दिया।
क्षत्रिय करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राज शेखावत समेत प्रदर्शन में शामिल लोगों ने यूजीसी रेगुलेशन का विरोध किया। जुलूस रोके जाने के बाद प्रदर्शनकारी धरने पर बैठ गए। इस दौरान मौके पर हंगामे की स्थिति भी बनी। डॉ. राज शेखावत ने मांग की कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री के साथ प्रतिनिधिमंडल की बैठक तय कराई जाए, ताकि नियमों को लेकर सरकार के रुख की जानकारी मिल सके।
धरने की सूचना पर पुलिस उपायुक्त भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों के संबंध में शिक्षा मंत्री से बातचीत की जाएगी। अधिकारियों के समझाने और आश्वासन के बाद देर रात प्रदर्शनकारियों ने धरना समाप्त कर दिया। हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने पुलिस प्रशासन को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। उनका कहना है कि इसके बाद मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों और ज्ञापन पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो छह सितंबर को दिल्ली में बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उनका दावा है कि आंदोलन की शुरुआत एक गांव से हुई है और आने वाले दिनों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई गांवों से लोग इसमें शामिल होकर दिल्ली पहुंचेंगे।
एडीएम सिटी विकास कश्यप ने बताया कि प्रदर्शनकारियों की ओर से अपनी मांगों से संबंधित पत्र दिया गया है। पत्र को जिलाधिकारी के माध्यम से शिक्षा मंत्रालय भेजा जाएगा। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के नाम भी उपलब्ध कराए गए हैं। नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।




