हिंडन नदी में नहाना-कपड़े धोना हो सकता है खतरनाक, नदी के पानी में मिले हैं खतरनाक बैक्टीरिया

गाजियाबाद ब्यूरो। हिंडन नदी जहरीली हो चुकी है। इसकी एक बूंद भी पेट का इंफेक्शन, पीलिया, टाइफाइड और कैंसर की भी वजह बन सकती है। यूपी पलूशन कंट्रोल बोर्ड  ने सहारनपुर से गौतमबुद्ध नगर तक हिंडन के पानी के क्या हालात है, इसकी एक रिपोर्ट जारी की है। छह जिलों से होकर गाजियाबाद पहुंचते ही नदी के पानी में सीवर की मात्रा काफी अधिक हो गई। बाकी जिलों की तुलना में टोटल कोलीफॉर्म और फेकल कोलीफॉर्म की मात्रा अधिक मिली हैं। टोटल कोलीफॉर्म में वे बैक्टीरिया शामिल होते हैं जो मानव या पशु अपशिष्ट में पाए जाते हैं। फेकल कोलीफॉर्म टोटल कॉलीफॉर्म का समूह है, जो विशेष रूप से जानवरों की आंत और मल में मौजूद होता है।

हिंडन के पानी से आसपास के किसान सिंचाई करते हैं। कारोबारी सब्जी व फल धोते हैं। कई जगह इसी पानी से कपड़े भी धुले जाते हैं। एमएमजी अस्पताल के सीनियर फिजीशियन डॉ. आरपी सिंह ने बताया कि ऐसे पानी से अगर सब्जी या फल धुला गया तो लीवर और पेट से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं। कच्ची खाए जाने वाली सब्जियों और फलों को तो कई बार रगड़कर पानी से धुलकर ही इस्तेमाल करें। हिंडन के पानी से अगर लंबे समय तक सब्जियों या फसलों की सिंचाई होगी तो उनके सेवन से कैंसर होने की भी आशंका बढ़ सकती है। कई रोग जनक माइक्रोन्यूट्रिएंट पानी के जरिए सब्जियों, फलों और फसलों तक पहुंच सकते हैं। ऐसे पानी में नहाना, कपड़े धोना भी खतरनाक है। चर्म रोग होने की आशंका बढ़ जाती है।
यूपी पलूशन कंट्रोल बोर्ड ने जो जांच का जो डेटा जारी किया है, उसमें गौतमबुद्ध नगर की रिपोर्ट नहीं है। सहारनपुर से गौतमबुद्ध नगर तक कई जिलों से गुजरने वाली हिंडन का पानी जहरीला है। यह जलीय जंतुओं के रहने लायक भी नहीं है। पानी में गुलनशील रासायनिक ऑक्सिजन और जैव ऑक्सिजन  का स्तर खतरनाक है। हिंडन जल बिरादरी से जुड़े पर्यावरणविद् विक्रांत ने कहा कि हिंडन को बचाने के लिए लॉन्ग टर्म की योजना बनानी होगी। नदी के दोनों तरफ 500 मीटर का ग्रीन कॉरिडोर बनाना होगा। नाले के पानी को साफ करने के लिए एसटीपी लगाने की जरूरत है। एसटीपी ठीक से चल रहे हैं या नहीं, इसकी निगरानी की व्यवस्था हो।

पिछले साल हिंडन के पानी की गुणवत्ता की रिपोर्ट देखें तो इस साल पिछले साल की तुलना में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन पानी में जहर अब भी है। बीओडी, सीओडी और कोलीफॉर्म के स्तर में काफी सुधार हुआ है। दावा किया जा रहा है कि जो प्रयास चल रहे हैं, उसका जल्द ही और असर दिखने लगेगा। हिंडन को साफ किए जाने के लिए मंडलायुक्त की अध्यक्षता में एक कमिटी बनी है। यह कमिटी जिले में जितने नाले नदी में सीधे गिर रहे हैं, उसे एसटीपी के साथ लिंक किए जाने का निर्देश दिया है। यदि एसटीपी के साथ लिंक नहीं हो पा रहे हैं तो उसे नदी में गिरने से पहले उसके पानी को ट्रीट किए जाने का इंतजाम किया जाए। दूसरी तरफ जल निगम कुछ नए एसटीपी के निर्माण किए जाने की तैयारी कर रहा है।

सहारनपुर से लेकर गाजियाबाद तक औद्योगिक इकाइयों से हिंडन में घुल रहे जहर से भूजल स्तर प्रभावित हो रहा है। भूजल में आर्सेनिक, लैड, क्रोम जैसे हैवी मैटल्स घुल गए हैं। ये सेहत के लिए बेहद हानिकारक हैं। डॉक्टरों का कहना है कि लेड और आर्सेनिक युक्त पानी का ज्यादा इस्तेमाल किए जाने से कैंसर की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। प्रदूषित पानी की वजह से सामान्यत: हेपेटाइटिस-ए और ई, लीवर और पेट की बीमारी हो सकती है। हेवी मेटल्स नर्वस सिस्टम को भी प्रभावित कर देते हैं। रीजनल ऑफिसर यूपी पलूशन कंट्रोल बोर्ड उत्सव शर्मा ने कहा कि गाजियाबाद में बिना साफ किए गए नाले का पानी नदी में गिरता है। इसकी वजह से यहां टोटल और फेकल कोलीफॉर्म की मात्रा बहुत अधिक है। बीओडी और सीओडी का स्तर सहारनपुर और मेरठ की तुलना में गाजियाबाद में कम है।

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