पटना को ‘जंतर-मंतर’ बनाने पर उतारु नौजवान, शिक्षक अभ्यर्थियों और पीएचडी धारकों का प्रदर्शन जारी

पटना का गर्दनीबाग दिल्ली के जंतर-मंतर की तरह बड़े आंदोलन का केंद्र बनता जा रहा है। शिक्षक अभ्यर्थी, अतिथि शिक्षक और पीएचडी धारक लगातार सड़कों पर डटे हैं। परीक्षा प्रणाली में सुधार, स्थायी बहाली और बेरोजगारी के खिलाफ युवाओं का आक्रोश चरम पर है, जिससे राज्य का सियासी माहौल पूरी तरह गर्मा गया है।

पटना/एजेंसी। बिहार की राजधानी पटना का गर्दनीबाग इन दिनों विभिन्न मांगों को लेकर चल रहे आंदोलनों का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। शिक्षक अभ्यर्थियों, विश्वविद्यालयों के अतिथि शिक्षकों और पीएचडी धारकों के लगातार प्रदर्शन से राजधानी का सियासी माहौल गरमा गया है। परीक्षा प्रणाली में सुधार, स्थायी नियुक्ति, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।
बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) द्वारा शिक्षक भर्ती परीक्षा टीआरई-4 के लिए अधिसूचना जारी किए जाने के बावजूद शिक्षक अभ्यर्थियों ने अपना आंदोलन समाप्त नहीं किया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अधिसूचना जारी होने के बाद भी उनकी कई प्रमुख मांगें लंबित हैं। मंगलवार को प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी थी कि यदि टीआरई-4 की अधिसूचना जारी नहीं की गई तो शिक्षा मंत्री के आवास का घेराव किया जाएगा। इसके करीब पांच घंटे बाद बीपीएससी ने 32 हजार से अधिक पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी कर दी थी।
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, टीआरई-4, पुस्तकालयाध्यक्ष और अवर निरीक्षक भर्ती परीक्षाओं में एकल स्तरीय परीक्षा प्रणाली लागू करने, कथित भ्रष्ट तरीके से नौकरी हासिल करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तथा बीएसएससी की भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने जैसी मांगें अभी पूरी नहीं हुई हैं। इसी कारण अभ्यर्थियों ने आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया है।
कथित छात्र नेता दिलीप कुमार ने कहा कि प्रदर्शनकारियों की मांगों पर अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि गुरुवार को सभी प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों के साथ बैठक कर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने पर निर्णय लिया जाएगा। इससे पहले भी उन्होंने मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में भूख हड़ताल की चेतावनी दी थी।
गर्दनीबाग में शिक्षक अभ्यर्थियों के धरना स्थल के पास ही बिहार के विभिन्न विश्वविद्यालयों के अतिथि शिक्षक और पीएचडी धारक भी लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, उनका धरना दो सप्ताह से अधिक समय से जारी है। इनमें शामिल कुमुद पटेल पिछले 16 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठी हैं।
अतिथि शिक्षकों और पीएचडी धारकों की प्रमुख मांगों में सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के 2018 के नियम लागू करना, आवेदकों की अधिकतम आयु सीमा बढ़ाकर 55 वर्ष करना, सहायक प्राध्यापकों की नियुक्तियों को नियमित करना और आवास नीति लागू करना शामिल है। प्रदर्शनकारियों ने उच्च शिक्षा मंत्री संजय सिंह टाइगर और अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह के इस्तीफे की मांग भी उठाई है।
बताया गया कि अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने कुछ दिन पहले प्रदर्शनकारियों के साथ बैठक कर उनकी समस्याओं का समाधान निकालने का प्रयास किया था। हालांकि, प्रदर्शनकारियों का आंदोलन अभी जारी है। गुरुवार को प्रस्तावित बैठक और भूख हड़ताल को लेकर शासन-प्रशासन की भी नजर बनी हुई है।
लगातार जारी प्रदर्शनों के चलते गर्दनीबाग बिहार में युवाओं और शिक्षकों की मांगों को लेकर आंदोलन के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है। अब सरकार के सामने प्रदर्शनकारियों की मांगों का समाधान निकालने और आंदोलन को समाप्त कराने की चुनौती है।

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