देश के पूर्व सेना प्रमुख जनरल विश्वनाथ शर्मा का निधन
भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख जनरल विश्वनाथ शर्मा का 96 वर्ष की आयु में नई दिल्ली में निधन हो गया।

नई दिल्ली। भारतीय सेना के पूर्व सेना प्रमुख जनरल विश्वनाथ शर्मा का शुक्रवार को 96 साल की उम्र में निधन हो गया। जनरल शर्मा ने चीन के साथ 1987 के सैन्य गतिरोध के दौरान अहम भूमिका निभाई थी। 1950 में 16वीं लाइट कैवेलरी में कमीशन पाने वाले जनरल शर्मा, आजादी के बाद कमीशन पाने वाले पहले ऐसे अधिकारी थे जो सेना प्रमुख के पद तक पहुंचे थे। उन्होंने 1 मई 1988 से 30 जून 1990 तक 14वें सेना प्रमुख के तौर पर सेवाएं दीं।
इसी दौरान श्रीलंका में भारतीय शांति सेना (IPKF) का ऑपरेशन चल रहा था और पूर्वोत्तर में स्थिति संवेदनशील थी। जिसमें उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। मेजर के तौर पर उन्होंने 1965 की लड़ाई में लाहौर सेक्टर में लड़ाई लड़ी। बाद में उन्होंने 66 आर्मर्ड रेजिमेंट की कमान संभाली और वेलिंगटन में डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज में इंस्ट्रक्टर के तौर पर काम किया।
साल 1971 की लड़ाई के दौरान, उन्होंने एक आर्मर्ड डिवीजन के कर्नल जनरल स्टाफ (ऑपरेशन्स) के तौर पर सेवाएं दीं। उनकी बाद की कमानों में उग्रवाद प्रभावित इलाकों में माउंटेन ब्रिगेड, राजस्थान में आर्मर्ड ब्रिगेड और पूर्वी सेक्टर में माउंटेन डिवीजन शामिल थे।
उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल और बाद में परम विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया। पूर्वी सेना कमांडर के तौर पर जनरल शर्मा का कार्यकाल अरुणाचल प्रदेश में तनावपूर्ण सुमदोरोंग चू गतिरोध के समय का था।
जनरल शर्मा के कार्यकाल के दौरान सेना एक तरफ श्रीलंका में लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (LTTE) से लड़ रही थी, तो दूसरी तरफ पूर्वोत्तर और पंजाब में उग्रवाद का भी सामना कर रही थी।
कश्मीर में भी उग्रवाद की शुरुआत हो चुकी थी, जबकि सियाचिन ग्लेशियर इलाके में भी लगातार गोलीबारी हो रही थी।
जनरल शर्मा का परिवार भी वीरता और सैन्य परंपरा से गहराई से जुड़ा था। उनके बड़े भाई, मेजर सोमनाथ शर्मा, 1947 में बडगाम की लड़ाई में अपनी बहादुरी के लिए परमवीर चक्र पाने वाले पहले व्यक्ति थे। जनरल शर्मा का निधन एक ऐसे सैनिक-विद्वान के युग का अंत है, जिनमें ऑपरेशन की बेहतरीन समझ और सिखाने की अद्भुत क्षमता का संगम था।




