कोहड़ौरा सहकारी समिति में यूरिया की किल्लत से किसानों में आक्रोश, पानी की टंकी पर चढ़कर बायोमेट्रिक कराने का आरोप

संवाददाता/विजय कुमार मिश्रा
बलरामपुर/उत्तर प्रदेश। विकासखंड हरैया सतघरवा अंतर्गत कोहड़ौरा सहकारी समिति में यूरिया की किल्लत को लेकर किसानों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। किसानों ने आरोप लगाया है कि खाद वितरण व्यवस्था अव्यवस्थित होने के साथ-साथ जोखिमपूर्ण भी है, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है।
किसानों के अनुसार, यूरिया वितरण के दौरान उनसे बायोमेट्रिक सत्यापन के लिए लगभग 100 फीट ऊंची पानी की टंकी पर चढ़कर अंगूठा लगवाया जा रहा है। किसानों का कहना है कि यह प्रक्रिया न केवल असुविधाजनक है, बल्कि उनकी जान के लिए भी खतरा साबित हो सकती है। उन्होंने बताया कि मजबूरीवश उन्हें अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना टंकी पर चढ़ना पड़ रहा है, क्योंकि बिना बायोमेट्रिक सत्यापन के उन्हें यूरिया नहीं दिया जा रहा।
स्थानीय किसानों का यह भी आरोप है कि सरकार द्वारा निर्धारित यूरिया की कीमत 266.50 रुपये प्रति बोरी है, जबकि सहकारी समिति में उनसे 280 रुपये प्रति बोरी की दर से वसूली की जा रही है। इससे किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
किसानों ने बताया कि उन्हें 10 जुलाई को यूरिया उपलब्ध होने का संदेश प्राप्त हुआ था, लेकिन 29 जुलाई तक भी कई किसानों को खाद नहीं मिल सकी है। इस देरी के कारण खरीफ फसलों की बुवाई और देखभाल प्रभावित हो रही है, जिससे उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।
कुछ किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि जो किसान पानी की टंकी पर चढ़ने में असमर्थ हैं, उन्हें यूरिया नहीं दिया जा रहा है। इससे वृद्ध और शारीरिक रूप से कमजोर किसानों को विशेष रूप से कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यूरिया वितरण के लिए सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही निर्धारित मूल्य पर समय पर खाद उपलब्ध कराई जाए और यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए। इस पूरे मामले को लेकर क्षेत्र के किसानों में रोष व्याप्त है और वे शीघ्र समाधान की अपेक्षा कर रहे हैं।




