कोतमा न्यायालय में श्रद्धा, सम्मान और उत्साह के साथ मनाई गई गुरु पूर्णिमा

सुमिता शर्मा/जिला ब्यूरो चीफ
अनूपपुर/मध्य प्रदेश। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर कोतमा न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं द्वारा अपने गुरुजनों एवं वरिष्ठ अधिवक्ताओं के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करते हुए इस पर्व को हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम के दौरान गुरु-शिष्य परंपरा की गरिमा को रेखांकित करते हुए वरिष्ठजनों का अभिनंदन किया गया तथा उन्हें प्रतीक स्वरूप स्मृति चिन्ह भेंट किए गए।
इस अवसर पर न्यायालय परिसर में विशेष आयोजन किया गया, जिसमें अधिवक्ताओं ने एकत्र होकर अपने-अपने गुरुजनों का आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ताओं का पुष्पगुच्छ एवं सम्मान सामग्री देकर अभिनंदन किया गया। पूरे आयोजन में आपसी सौहार्द, अनुशासन और परंपरा के प्रति सम्मान की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
कार्यक्रम में उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता राम प्रकाश शुक्ला ने अपने संबोधन में कहा कि गुरु केवल ज्ञान का संचार ही नहीं करते, बल्कि जीवन में सही दिशा और उद्देश्य प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु का मार्गदर्शन व्यक्ति को न केवल पेशेवर जीवन में बल्कि व्यक्तिगत जीवन में भी सफल बनाता है। उन्होंने सभी अधिवक्ताओं से आह्वान किया कि वे अपने गुरुजनों के आदर्शों को आत्मसात करते हुए न्याय और सत्य के मार्ग पर चलें।
अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष राजेश सोनी ने भी इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि गुरु के बिना ज्ञान की प्राप्ति संभव नहीं है और जीवन में मोक्ष की प्राप्ति भी गुरु के मार्गदर्शन से ही होती है। उन्होंने कहा कि गुरु ही व्यक्ति को सत्य और असत्य के बीच अंतर समझाने तथा उसके दोषों को दूर करने में सक्षम बनाते हैं। उन्होंने सभी से गुरु परंपरा के महत्व को बनाए रखने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान अधिवक्ताओं ने एक-दूसरे को गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं दीं और गुरु-शिष्य संबंधों को सुदृढ़ बनाए रखने का संकल्प लिया। न्यायालय परिसर में पूरे दिन उत्साह और आध्यात्मिक वातावरण बना रहा, जहां अधिवक्ताओं के बीच पारस्परिक सम्मान और सहयोग की भावना देखने को मिली।
गौरतलब है कि गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति में गुरु के प्रति आस्था और श्रद्धा प्रकट करने का प्रमुख पर्व है, जिसे विभिन्न संस्थानों और संगठनों में विशेष रूप से मनाया जाता है। इसी क्रम में कोतमा न्यायालय में आयोजित यह कार्यक्रम भी परंपरा और संस्कृति के संरक्षण का एक महत्वपूर्ण उदाहरण रहा।




