कानपुर के युवक ने एआई और टेलीग्राम से बनाए फर्जी बैंकिंग ऐप, सूरत साइबर सेल ने किया गिरफ्तार

गुजरात के सूरत साइबर क्राइम सेल ने कानपुर के युवक को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने एआई और टेलीग्राम की मदद से फर्जी बैंकिंग ऐप और वायरस वाले एपीके तैयार कर देशभर के साइबर अपराधियों को सप्लाई किए।

कानपुर/उत्तर प्रदेश। गुजरात के सूरत साइबर क्राइम सेल ने एक 18 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई ) और टेलीग्राम के जरिए फर्जी बैंकिंग ऐप और वायरसयुक्त एपीके फाइलें बनाकर देशभर के साइबर अपराधियों को उपलब्ध करा रहा था। आरोपी की पहचान रोहित वीरेंद्र सिंह शाक्य के रूप में हुई है, जो उत्तर प्रदेश के कानपुर का निवासी है और केवल 11वीं तक शिक्षित है।
पुलिस के अनुसार आरोपी 16 वर्ष की उम्र से ही साइबर अपराध में उपयोग होने वाले टूल तैयार कर रहा था। जांच एजेंसियों का दावा है कि उसके बनाए गए फर्जी ऐप का इस्तेमाल झारखंड के जामताड़ा समेत हरियाणा और राजस्थान के कई साइबर गिरोह कर रहे थे।
मामले का खुलासा सूरत में दर्ज एक साइबर ठगी की जांच के दौरान हुआ। मई माह में एक व्यक्ति को व्हाट्सएप पर पंजाब नेशनल बैंक (PNB One) जैसा दिखने वाला एक एपीके लिंक भेजा गया था। पीड़ित ने उसे असली बैंकिंग ऐप समझकर अपने मोबाइल में इंस्टॉल कर लिया, जिसके बाद उसका फोन हैक हो गया और कुछ ही मिनटों में उसके प्राइम को-ऑपरेटिव बैंक खाते से पांच लाख रुपये निकालकर यूनियन बैंक के एक खाते में ट्रांसफर कर दिए गए।
शिकायत मिलने के बाद सूरत साइबर क्राइम सेल ने तकनीकी विश्लेषण के आधार पर जांच आगे बढ़ाई और आरोपी तक पहुंच गई। इसके बाद साइबर क्राइम सेल और आईटी विशेषज्ञों की टीम ने कानपुर के एक होटल में छापा मारकर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। उसके कब्जे से लैपटॉप, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरण बरामद किए गए हैं, जिनकी फॉरेंसिक जांच की जा रही है।
पुलिस के मुताबिक आरोपी एआई टूल्स और टेलीग्राम का इस्तेमाल कर ऐसे एपीके तैयार करता था, जिन्हें मोबाइल में इंस्टॉल करते ही डिवाइस हैक हो जाती थी। वह दो प्रकार के एप्लिकेशन बनाता था—एक पीड़ित के मोबाइल में इंस्टॉल कराने के लिए और दूसरा एडमिन ऐप, जिसके जरिए साइबर अपराधी पीड़ित के मोबाइल पर आने वाले ओटीपी, बैंकिंग डिटेल्स और अन्य संवेदनशील जानकारियों को रियल टाइम में देख सकते थे।
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी सब्सक्रिप्शन मॉडल पर साइबर अपराधियों से पैसे वसूलता था। शुरुआती सॉफ्टवेयर देने के लिए वह 15 हजार रुपये लेता था और इसके बाद हर महीने 15 हजार रुपये रखरखाव और तकनीकी सहायता के नाम पर वसूलता था। वह ग्राहकों की मांग के अनुसार बैंकों, सरकारी विभागों और बड़ी कंपनियों के हूबहू दिखने वाले फर्जी ऐप भी तैयार करता था।
पुलिस के अनुसार आरोपी द्वारा तैयार किए गए नकली ऐप्स में पीएनबी, एसबीआई, एक्सिस बैंक, यूको बैंक, अमेरिकन एक्सप्रेस, बिगबास्केट और आरटीओ चालान जैसी सेवाओं के नाम शामिल थे, जिनका इस्तेमाल कथित रूप से साइबर गिरोहों द्वारा ठगी के लिए किया जाता था।
सूरत पुलिस ने बताया कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की पहचान की जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि अब तक कितने गिरोहों को ऐसे फर्जी ऐप उपलब्ध कराए गए तथा उनसे कितनी साइबर ठगी की घटनाएं अंजाम दी गईं। मामले की जांच जारी है।

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