जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची का भारत दौरा प्रस्तावित, दिल्ली में कार्यक्रम होने की संभावना

दिल्ली के अलावा गुवाहाटी पर भी यात्रा के संभावित स्थान के तौर पर विचार किया गया था और जापानी पक्ष को इसका प्रस्ताव भी दिया गया था। सूत्रों ने कहा कि प्रधानमंत्री ताकाइची की घरेलू व्यस्तताओं को देखते हुए, उनके भारत आने और यहां से जाने के बीच का समय काफी कम है। इसे और राजधानी के बाहर यात्रा करने से जुड़ी अतिरिक्त लॉजिस्टिकल दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए, यात्रा के दिल्ली में ही होने की संभावना है।

नई दिल्ली/एजेंसी। जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची के अगले महीने 1 से 3 जुलाई के बीच भारत की अपनी पहली आधिकारिक यात्रा पर आने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, “लॉजिस्टिकल दिक्कतों” के चलते उनका अधिकांश कार्यक्रम राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में ही आयोजित किया जा सकता है।
सूत्रों ने बताया कि प्रारंभिक तौर पर गुवाहाटी को भी संभावित दौरे के स्थान के रूप में प्रस्तावित किया गया था और जापानी पक्ष को इस संबंध में जानकारी दी गई थी। हालांकि, प्रधानमंत्री ताकाइची की घरेलू व्यस्तताओं और सीमित समय को ध्यान में रखते हुए राजधानी के बाहर यात्रा को लेकर व्यावहारिक चुनौतियां सामने आई हैं, जिसके चलते कार्यक्रम को दिल्ली तक सीमित रखने पर विचार किया जा रहा है।
इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से कई अहम कार्यक्रमों को शामिल किए जाने की संभावना है। इसमें व्यापार, निवेश, सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है।
उल्लेखनीय है कि हाल ही में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने संकेत दिया था कि जापान की प्रधानमंत्री 1 जुलाई को गुवाहाटी आ सकती हैं और इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ शिखर-स्तरीय वार्ता हो सकती है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा किए गए अपने संदेश में इस संभावित यात्रा का उल्लेख किया था। जापानी मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार, इस दौरे में 50 से अधिक जापानी कंपनियों और संगठनों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है, जिससे निवेश और औद्योगिक सहयोग को नई दिशा मिल सकती है।
वहीं, रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सनाए ताकाइची के बीच होने वाली बैठक में सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय साझेदारी जैसे अहम विषयों पर ठोस चर्चा हो सकती है। यह वार्ता पिछले वर्ष घोषित भारत-जापान संयुक्त विज़न के आधार पर आगे बढ़ाई जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा भारत-जापान संबंधों को नई गति देने और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में दोनों देशों की साझेदारी को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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