कानपुर में मां का कटा हाथ लेकर कमिश्नर ऑफिस पहुंचा आईटीबीपी जवान, अस्पताल पर कार्रवाई की मांग, सीएमओ से जांच रिपोर्ट तलब
कानपुर में आईटीबीपी जवान विकास सिंह अपनी मां का कटा हुआ हाथ लेकर पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गया। आरोप है कि निजी अस्पताल की कथित लापरवाही और गलत इलाज के कारण उनकी मां का हाथ काटना पड़ा।

कानपुर/उत्तर प्रदेश। कानपुर से एक बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां इंडो-तिब्बती बॉर्डर पुलिस (आईटीबीपी) का एक जवान अपनी मां का कटा हुआ हाथ थर्माकोल बॉक्स में लेकर सीधे पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गया। जवान का आरोप है कि एक निजी अस्पताल की कथित लापरवाही और गलत इलाज के कारण उसकी मां का हाथ काटना पड़ा। वहीं, उसने पुलिस पर भी आरोप लगाया कि शिकायत के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं की गई। इस घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था, पुलिस कार्रवाई और मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आईटीबीपी जवान विकास सिंह के मुताबिक, 13 मई को उनकी मां को सांस लेने में दिक्कत होने के बाद कानपुर के जीटी रोड स्थित कृष्णा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। आरोप है कि इलाज के दौरान डॉक्टरों ने गलत इंजेक्शन लगाया, जिससे दाहिने हाथ में गंभीर संक्रमण फैल गया। परिजनों का कहना है कि हालत बिगड़ने के बाद महिला को पारस अस्पताल रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों ने संक्रमण को शरीर में फैलने से रोकने के लिए हाथ काटने की जरूरत बताई। विकास सिंह के अनुसार, संक्रमण तेजी से बढ़ने के कारण 17 मई को उनकी मां का दाहिना हाथ काटकर अलग करना पड़ा। परिवार का आरोप है कि यह स्थिति कथित चिकित्सीय लापरवाही की वजह से बनी। हालांकि, अस्पताल पक्ष या मेडिकल जांच की आधिकारिक रिपोर्ट आने तक आरोपों की पुष्टि होना बाकी है।
जवान का आरोप है कि वह कृष्णा हॉस्पिटल के डॉक्टरों के खिलाफ शिकायत लेकर रेल बाजार थाने के कई चक्कर लगाता रहा, लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। इसी से नाराज होकर वह कथित सबूत के तौर पर मां का कटा हाथ मेडिकल किट (थर्माकोल बॉक्स) में लेकर पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गया। कमिश्नर ऑफिस में यह दृश्य देखकर हड़कंप मच गया और मामला तुरंत अधिकारियों के संज्ञान में आया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को पूरे प्रकरण की जांच के लिए विशेष मेडिकल बोर्ड गठित करने के निर्देश दिए हैं। अब जांच में यह स्पष्ट होगा कि क्या इलाज में वास्तव में लापरवाही हुई थी या नहीं। रिपोर्ट के आधार पर आगे अस्पताल और संबंधित डॉक्टरों पर कार्रवाई तय हो सकती है। यह मामला सिर्फ एक परिवार के दर्द तक सीमित नहीं है, बल्कि अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता, मरीजों की सुरक्षा और शिकायतों पर पुलिस कार्रवाई जैसे कई गंभीर मुद्दों को सामने लाता है। अब मेडिकल बोर्ड की जांच रिपोर्ट पर सबकी नजर टिकी है।




