महिला डीटीसी बस मार्शल ने लगाया यौन उत्पीड़न का आरोप, किया आत्महत्या का प्रयास

नई दिल्ली। डीटीसी में महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा के लिए लगाई गईं महिला मार्शल खुद कितनी सुरक्षित हैं, इस पर सवाल उठ रहा है। आरोप है कि एक महिला मार्शल के साथ डीटीसी बस के ड्राइवर और कंडक्टर ही छेड़छाड़ करते थे। इसकी शिकायत विभाग व पुलिस में करने पर उस महिला मार्शल को नौकरी तक से निकाल दिया गया। इस कारण उसने जहरीला पदार्थ खाकर खुदकुशी का प्रयास किया। उसका अस्पताल में इलाज चल रहा है। आरोप है कि उसकी शिकायत पर किसी ने कोई एक्शन नहीं लिया। घर की जिम्मेदारी लड़की पर ही थी। अब नौकरी चली गई तो उसने तनाव में आकर यह कदम उठाया। बहरहाल पीड़िता ने मीडिया को बताया कि अब पुलिस उनका बयान ले गई है। आरोपियों को उन्होंने बुलाया था, मगर वह आए नहीं। मामले की छानबीन की जा रही है। उधर, इस मामले में दिल्ली महिला आयोग ने दिल्ली पुलिस और दिल्ली परिवहन निगम को नोटिस जारी किया है। आयोग ने एफआईआर दर्ज करने और गिरफ्तार आरोपियों की जानकारी मांगी है। यौन उत्पीड़न और धमकाने के इस मामले में आयोग ने दिल्ली पुलिस और डीटीसी से महिला से मिली शिकायतों और कार्रवाई का ब्योरा भी 12अगस्त तक मांगा है। आयोग ने डीटीसी से पूछा है कि क्या कानून के तहत मामला आंतरिक शिकायत समिति या स्थानीय शिकायत समिति को भेजा गया था और मामले में संबंधित दस्तावेजों की प्रतियां मांगी हैं।

एक साल पहले ही शुरू की थी नौकरी
युवती (24) परिवार के साथ सुल्तानपुरी इलाके में रहती है। पिता हार्ट पेशंट हैं। घर में कोई और कमाने वाला नहीं है। इस कारण युवती ने काम करना शुरू किया। करीब एक साल पहले बतौर मार्शल उन्होंने ड्यूटी जॉइन की थी। पहले जिस डिपो में ड्यूटी थी, वो घर से दूर था। इस कारण उन्होंने अपना ट्रांसफर कराया था। बीती 20 मई को वह सुभाष प्लेस डिपो में आईं। 15 दिन तक तो सब कुछ ठीक रहा। इसके बाद एक बस का कंडक्टर उन पर दोस्ती करना दबाव बनाने लगा। आरोप है कि ऑफर ठुकराने के बाद उनकी ड्यूटी गलत ड्राइवर और कंडक्टरों के साथ लगाने लगे। उनके साथ बस में छेड़छाड़ की जाती, गाली दी जाती। पीड़िता ने इसकी शिकायत भी की। 15 जुलाई को मामला केशवपुरम थाने पहुंचा, मगर डिपो मैनेजर ने समझौता करा दिया। अब युवती के साथ फिर यह सब कुछ हुआ। उसने दोबारा आवाज उठाई तो 20 जुलाई को उसे नौकरी से ही हटा दिया गया। अब 23 जुलाई को युवती ने पुलिस व अन्य विभागों को शिकायत दी।
समझौते के लिए अधिकारियों ने किया मजबूर
महिला ने बताया कि उसने केशवपुरम थाने में शिकायत दर्ज कराई, मगर डिपो प्रबंधक और बाकी कर्मचारियों ने उसे समझौते के लिए मजबूर कर दिया और जान से मारने की धमकी भी दी। उसने बताया कि 20 जुलाई को डिपो प्रबंधक ने उसे ड्यूटी से बर्खास्त कर दिया। उसने संबंधित एसडीएम से संपर्क किया, जिसने उसे फिर से डिपो में शामिल होने के लिए भेज दिया, मगर डिपो मैनेजर और बाकी स्टाफ ने उसे जॉइनिंग देने से मना कर दिया और शिकायतें वापस लेने को कहा। डिपार्टमेंट के लोग युवती से कहने लगे कि वह पुलिस को दी गई शिकायत वापस ले, तब उसे काम पर रखेंगे। युवती ने शिकायत वापस नहीं ली। आरोपियों ने उसे नौकरी पर नहीं रखा। वह लगातार ट्वीट कर के संबंधित विभागों व नेताओं से मदद मांगती रही। मगर किसी ने उसकी नहीं सुनी। जिस कारण परेशान होकर उन्होंने 5 अगस्त को युवती ने अपने घर में कोई जहरीला पदार्थ खाकर खुदकुशी करने की कोशिश की। मगर उसकी जान बच गई।

स्वाति मालीवाल ने कहा, महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा के लिए बस मार्शल तैनात किए गए हैं, ऐसे में महिला बस मार्शलों को सुरक्षा देना डीटीसी की जिम्मेदारी है। महिला बस मार्शल ने बहुत गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसकी तत्काल जांच की जरूरत है। दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आरोपियों से पूछताछ की जाए।

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