वैदिक कक्षा में छात्र सांस्कृतिक एवं पारंपरिक ज्ञान के सागर में लगा रहे डुबकी, सीख रहे गुरुकुल संस्कृति

नई दिल्ली। राजधानी में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को गुरुकुल शिक्षा पद्धति से अवगत कराया जा रहा है। इसमें छात्रों को वैदिक गणित में संख्या सूत्र से लेकर संस्कृत भाषा को दिनचर्या में बोल-चाल में प्रयोग करना सिखाया जा रहा है। जिस तरह गुरुकुल में छात्र रहते हैं, ठीक उसी प्रकार यहां छात्रों को उनकी वेश-भूषा से लेकर गुरुकुल के जीवन के बारे में बताया जा रहा है।
छात्रों को भारतीय शास्त्रीय संगीत का ज्ञान दिया जा रहा है तो खेल-खेल में संस्कृत सिखाने के लिए नई विधि का प्रयोग किया जा रहा है। इन कक्षाओं में छात्र सांस्कृतिक एवं पारंपरिक ज्ञान के सागर में डुबकी लगा रहे हैं। कार्यशाला में भाग लेने वाले छात्रों में उत्साह देखते ही बन रहा है।
छात्र संस्कृत में एक-दूसरे से बात करते दिखे। खास बात यह है कि इसमें शामिल छात्रों को मोबाइल फोन से दूर रखा गया है। प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान की ओर से ग्रीष्मकालीन अवकाश में आयोजित कार्यशाला में आश्रम में स्थित जयराम संस्कृत वेद विद्यालय में छात्रों को वेद, दर्शन और उपनिषदों का ज्ञान देने के साथ योगासन, मल्लखंब, कुश्ती का अभ्यास कराया जा रहा है।
सिखाया जा रहा है अनुशासित जीवन जीने का तरीका
छात्रों को विभिन्न विषयों और एक सुसंस्कृत व अनुशासित जीवन जीने के तरीकों की जानकारी दी जा रही है। इसमें किताबी ज्ञान के अलावा छात्रों का बौद्धिक, शारीरिक और आत्मिक विकास किया जा रहा है। छात्रों का चरित्र निर्माण करने, वेद का ज्ञान देने और विभिन्न प्रकार की शिक्षा दी जा रही है।
दिल्ली के सरकारी स्कूलों के 200 छात्र शामिल हुए
इसमें छठी से 12 वीं कक्षा के दो सौ से अधिक छात्र शामिल हैं। कार्यशाला 30 जून तक सुचारू रूप से चलेगी। कार्यशाला में छात्र आपस में भाईचारा, मानवता, प्रेम और अनुशासन में रहने के तरीके को बताया जा रहा है। यहां छात्रों को गुरुकुल संस्कृति से अवगत कराया जा रहा है। रोहिणी से आए 11 वीं कक्षा के छात्र ने राहुल ने कहा कि उन्हें इसके बारे में स्कूल से पता चला था। गुरुकुल के बारे में पहले केवल सुना ही था, यहां आकर मन को काफी शांति मिल रही है और भारतीय संस्कृति के बारे में पता चल रहा है।
मौजूदा समय की आवश्यकता को देखते हुए शिक्षक-छात्र के दोस्ताना संबंध व सम्मान साझा करने का भी यह मंच प्रदान कर रहा है। इसमें छात्रों को एक ऐसा माहौल प्रदान किया जा रहा है जहां छात्र सुरक्षित महसूस करे और देखभाल करने वाले पर भरोसा करते हैं तो वे उसी का अनुकरण करना सीख रहे हैं।

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