यूपी बोर्ड की फर्जी वेबसाइट बनाकर 5-5 हजार में डिग्री बेचने वाले गिरोह का राजफाश

प्रयागराज में सरगना समेत दो गिरफ्तार

प्रयागराज/उत्तर प्रदेश। अगर आप भी फेल छात्र-छात्रा हैं और इंटरनेट मीडिया पर पास होने की डिग्री मिलने का विज्ञापन देख रहे हैं तो इस पर यकीन न करें। कहीं ऐसा न हो कि आपके हाथ भी फर्जी डिग्री और मार्कशीट लग जाए, जिससे भविष्य की राह कठिन हो जाए। साइबर पुलिस ने ऐसे ही एक गिरोह का राजफाश किया है, जो पांच-पांच हजार रुपये में विभिन्न विश्वविद्यालयों, दूरस्थ शिक्षा केंद्र की फर्जी डिग्री व मार्कशीट बेच रहे थे।
आजमगढ़ का गिरोह सरगना व रिश्तेदार गिरफ्तार
गिरोह के सरगना आजमगढ़ जिले के बरदह थाना क्षेत्र के सोहौली गांव निवासी शशि प्रकाश राय उर्फ राजन शर्मा और उसके रिश्तेदार ठेकमा गांव में रहने वाले मनीष कुमार राय को गिरफ्तार किया गया है। वह उप्र माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की फर्जी वेबसाइट बनाकर विद्यार्थियों की जानकारी लेकर संपर्क करते और फिर जाल में फंसाते थे।
यूपी बोर्ड ने साइबर थाने में दर्ज कराई थी रिपोर्ट
गुरुवार शाम पुलिस लाइन सभागार में डीसीपी गंगानगर कुलदीप सिंह गुनावत, एसीपी राजकुमार मीना ने गिरफ्तार आरोपितों को मीडिया के सामने पेश किया। बताया कि नवंबर 2025 में यूपी बोर्ड की ओर से साइबर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इसमें कहा गया था कि कुछ लोगों द्वारा यूपी बोर्ड की ओरिजिनल वेबसाइट www.upmsp.edu.in की कूटरचित वेबसाइट www.upmsp-edu.in बनाई गई है। फर्जी वेबसाइट के जरिए विद्यार्थियों, उनके अभिभावकों से साइबर ठगी की जा सकती है।
मुकदमा दर्ज करने के बाद साइबर थाने की पुलिस ने विवेचना शुरू की तो अहम सुराग मिले। पता चला कि इस काम में आजमगढ़ के दो युवक शामिल हैं। तब साइबर पुलिस ने स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) लखनऊ के सहयोग से शशि प्रकाश राय और उसके रिश्तेदार मनीष को पकड़ लिया। पूछताछ में पता चला कि शशि प्रकाश ने आजमगढ़ में सिपाह पुलिस चौकी के पास किराए पर कमरा लिया था, जहां श्रीएजूकेशन के नाम से काल सेंटर चलाता था।
यूपी बोर्ड की फर्जी वेबसाइट तैयार करने के बाद शशि प्रकाश और उसके रिश्तेदार की ओर से फेसबुक सहित दूसरे इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर मार्कशीट में नंबर बढ़ाने, फर्जी मार्कशीट बनाने का विज्ञापन देते थे। उसके बाद तमाम अभ्यर्थी, अभिभावक और शैक्षिक संस्थान उनसे संपर्क करते थे। फिर वह संबंधित कालेज, विश्वविद्यालय की मुहर, होलोग्राम, प्रोफार्मा तैयार करके साफ्टवेयर की मदद से हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, स्नातक, परास्नातक की फर्जी मार्कशीट व डिग्री तैयार करके पांच-पांच हजार में बेचते थे।
डीसीपी ने बताया कि शशिप्रकाश राय वर्ष 2014 से फर्जी डिग्री और मार्कशीट बनाने का काम कर रहा है। इस दौरान उसने यूपी और दूसरे प्रदेश के छात्र-छात्राओं, अभिभावकों को सात हजार से अधिक फर्जी डिग्री व मार्कशीट बेची है। बीएससी आइटी की डिग्री धारक शशि प्रकाश पहले एजूकेशन सेंटर में काम करता था। इसके बाद उसने पैसे के लालच में आकर फर्जीवाड़ा शुरू किया। सहयोग के लिए इंटरमीडिएट पास रिश्तेदार मनीष को रख लिया था। अभियुक्तों ने बताया कि वह फर्जी डिग्री व मार्कशीट कोरियर के माध्यम से लोगों को भेजते थे।
ओपन यूनिवर्सिटी के 70 एजूकेशन सेंटर से था संपर्क
बताया गया है कि अभियुक्तों का एनआइओएस और ओपन यूनिवर्सिटी के करीब 70 एजूकेशन सेंटर से संपर्क था। वहां पर फार्म भरने और अनुत्तीर्ण होने वाले विद्यार्थियों की जानकारी भी शशिप्रकाश तक पहुंचती थी। इस आधार पर पुलिस पूरे नेटवर्क और उसमें शामिल लोगों के बारे में जांच कर रही है। जल्द ही कई और की गिरफ्तारी किए जाने की बात कही जा रही है।
छत्रपति साहूजी समेत कई विश्वविद्यालय की फर्जी डिग्री
पुलिस का कहना है कि कानपुर स्थित छत्रपति साहूजी महाराज विश्वविद्यालय, दक्षिण भारत की कई विश्वविद्यालय की फर्जी डिग्री व मार्कशीट बनाते थे। शशिप्रकाश पिछले दो साल से आजमगढ़ में काल सेंटर खोलकर फर्जी डिग्री, मार्कशीट बनाने के लिए पूरा सेटअप तैयार किया था। पुलिस दोनाें आरोपितों के मोबाइल की काल डिटेल रिपोर्ट भी निकलवा रही है।
10 मोबाइल, विभिन्न विश्वविद्यालय की 42 फर्जी मुहर, छह मानीटर, पांच सीपीयू, दो पेन ड्राइव, विभिन्न विश्वविद्यालय की 217 फर्जी खाली मार्कशीट, एक हजार होलाग्राम, छह माउस, आठ कीबोर्ड, एक प्रिंटर, हिसाब-किताब की 10 कापी, रजिस्ट्री के सात लिफाफे, दो कलर प्रिंटर बरामद किया गया है।
साइबर टीम को मिलेगा इनाम
फर्जी डिग्री और मार्कशीट बनाकर बेचने वाले गिरोह का भंडाफोड़ साइबर थाना प्रभारी ओमनारायण गौतम, इंस्पेक्टर माे. आलमगीर, साइबर सेल प्रभारी घनश्याम यादव, सिपाही अनुराग यादव, शिवेंद्र, विनय, अतुल प्रदीप, प्रियांशी, शिखा, राकेश कुमार की टीम ने किया। डीसीपी ने पूरी टीम को इनाम देने की बात कही है।

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