मुंबई मेयर रितु तावड़े की कार से हटाई गई लाल-नीली बत्ती

सोशल मीडिया पर हंगामे के बाद बीएमसी ने हटाई लाइटें

कांती जाधव/मुंबई ब्यूरो। बीएमसी ने शनिवार को मुंबई की मेयर रितु तावड़े की सरकारी गाड़ी और उनके साथ चलने वाली एस्कॉर्ट गाड़ी पर लगी लाल और नीली बत्ती को हटा लिया है। बीएमसी ने यह कदम सोशल मीडिया पर हुए बवाल के बाद लिया है।
यह मुद्दा सबसे पहले सोशल मीडिया पर 11 मार्च को सामने आया। ‘एक्स’ पर ‘मुंबईचा शिवसैनिक’ (@shivsainik007) नाम के एक यूजर ने सवाल उठाया कि क्या मेयर की गाड़ी पर पुलिस जैसी लाल और नीली बत्तियां लगाने की अनुमति हैं। इस पोस्ट में मेयर की कार की एक तस्वीर भी शामिल थी, जिसमें ये बत्तियां दिखाई दे रही थीं।
यह मामला 13 मार्च को तब बढ़ गया, जब आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने मेयर को पत्र लिखकर इन लाइटों के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई। उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि यह देखा गया है कि सरकारी वाहनों के साथ-साथ एस्कॉर्ट वाहनों पर भी लाल और पीली बत्तियों का अनाधिकृत इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने आगे लिखा कि केंद्र सरकार द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, ऐसी लाइटों के इस्तेमाल पर रोक है और इनकी अनुमति केवल कुछ विशेष आपातकालीन सेवाओं के लिए ही है। उन्होंने आगे लिखा कि इस मामले को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और तत्काल आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।
इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि जांच करने पर उन्हें पता चला कि लाल बत्ती गाड़ी की छत पर नहीं, बल्कि बोनट पर लगी थी। उन्होंने कहा कि इसके लिए मेयर को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने आगे कहा कि हमारे पिछले फैसले में साफ तौर पर कहा गया है कि कोई भी लाल बत्ती का इस्तेमाल न करे और मेयर को इस बात की पूरी जानकारी है। उन्होंने कहा कि उन्हें बेवजह निशाना बनाया जा रहा है, जो सही नहीं है।
एक सरकारी अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की कि मेयर, डिप्टी मेयर और सदन के नेता की गाड़ियों पर भी इसी तरह की चमकने वाली लाइटें लगाई गई थीं और शनिवार को उन सभी को हटा दिया गया। इस विवाद के कारण राजनीतिक आलोचना भी शुरू हो गई। यूबीटी शिवसेना की नेता प्रतिपक्ष और मुंबई की पूर्व मेयर किशोरी पेडनेकर ने कहा कि यह कदम केंद्र सरकार द्वारा वीआईपी संस्कृति को खत्म करने की पहल के खिलाफ है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि वीआईपी संस्कृति को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार ने खत्म किया था, लेकिन मुंबई के मेयर वीआईपी संस्कृति के आकर्षण से खुद को रोक नहीं पाए। उन्होंने सवाल किया कि क्या मेयर, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से भी बड़ी हो गई हैं?
केंद्र सरकार ने लाल बीकन पर लगाई है रोक
सरकारी गाड़ियों पर ऐसी लाइटों के इस्तेमाल पर 1 मई 2017 से रोक लगा दी गई है। केंद्र सरकार ने अपने फैसले में सरकारी या किराए पर ली गई गाड़ियों पर लाल बीकन और नाम-प्लेट, प्रतीक-चिह्न और झंडे जैसे दूसरे निशान दिखाने पर पाबंदी लगा दी थी। सरकार ने अपने फैसले में सिर्फ उन गाड़ियों को ऐसी लाइटें इस्तेमाल करने की इजाजत दी थी, जो जरूरी आपातकालीन सेवाओं में लगी हैं। इस फैसले के बाद, तत्कालीन मेयर विश्वनाथ महादेश्वर के कार्यकाल के दौरान मुंबई के मेयर की सरकारी गाड़ी से लाल बीकन हटा दिया गया था। यूबीटी के एमएलसी मिलिंद नार्वेकर ने भी इस मुद्दे पर एक्स पर अपनी बात रखी और सवाल पूछा कि नए चुने गए मेयर के खिलाफ असल में चल क्या रहा है।

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