‘दलबदलुओं को नकारें’ का नारा देने वाली पार्टी ने तृणमूल के बागियों को अपनाया

त्रिपुरा की एनसीपीआई ने 2023 चुनाव में 'दलबदलुओं को नकारें' का नारा दिया था, अब तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों के गुट का स्वागत कर रही है।

त्रिपुरा। इसे एक राजनीतिक विडंबना ही कहेंगे कि तीन साल पहले जिस पार्टी ने ‘दलबदलुओं को नकारें’ का नारा दिया था, आज वही तृणमूल कांग्रेस के बागी नेताओं का स्वागत कर रही है। त्रिपुरा की एक कम जानी-मानी पार्टी एनसीपीआई रविवार को तब अचानक राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गई, जब तृणमूल कांग्रेस के 20 लोकसभा सदस्यों वाले बागी गुट ने इस पार्टी में विलय की घोषणा की।
इस दल ने 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में ‘अपने अधिकारों की रक्षा के लिए राजनीतिक दल-बदलुओं को नकारें’ के नारे के साथ चार उम्मीदवार उतारे थे।रिकार्ड बताते हैं कि नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी आफ इंडिया ने 2023 के त्रिपुरा चुनाव में चार सीटों–चावामानु, अंबासा, करमचारा और कैलाशहर से चुनाव लड़ा था। इन सीटों पर उसके उम्मीदवार या तो ‘नोटा’ से भी पीछे रहे या उन्हें ‘नोटा’ से बस कुछ ही ज्यादा वोट मिले।
पार्टी के चुनावी पोस्टरों पर यह संदेश था-अपने अधिकारों की रक्षा के लिए दलबदलू नेताओं को नकारें। राजनीतिक हस्तियों के बजाय समाज सेवकों का समर्थन करें। साथ ही मतदाताओं से पेन की निब वाले चुनाव चिह्न का बटन दबाने की अपील की गई थी, जो उसे एक रजिस्टर्ड लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी के तौर पर मिला था।
विधानसभा चुनाव में 536 वोट पाने वाले चावामानु से उम्मीदवार बरजेदा त्रिपुरा से जब प्रेट्र ने संपर्क किया तो उन्होंने तृणमूल के बागियों के विलय की खबर पर हैरानी जताई। कहा कि मैंने 2023 में चुनाव लड़ा था। अब तीन साल बाद क्या हुआ है? बरजेदा ने बताया कि वह दिहाड़ी मजदूर हैं। 2023 में कृष्ण देबबर्मा नाम के एक व्यक्ति ने मुझसे चुनाव के बारे में संपर्क किया। इसलिए मैंने चुनाव लड़ा। कई साल पहले तक मैं कांग्रेस का समर्थक था। देबबर्मा से इस बारे में टिप्पणी के लिए संपर्क नहीं हो सका।

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