बागपत में रुकावाया था अपना बाल विवाह, 13 वर्षीय पायल को मिला मुख्यमंत्री सम्मान, लेकिन सपनें अब भी अधूरे

बागपत/उत्तर प्रदेश। बागपत की 13 वर्षीय किशोरी पायल को सीएम योगी आदित्यनाथ ने सम्मानित किया है। बाल अधिकारों के प्रति सजग पायल के एक्शन को लेकर उन्हें सम्मानित किया गया है। पायल की बहादुरी की इस समय हर कोई चर्चा कर रहा है। बच्ची को जब सीएम योगी से सम्मान मिला तो पूरा परिवार झूम उठा। वही परिवार, जिसने ने किशोरी की शादी तय कर दी थी। पायल ने सरकार के बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता अभियान के तहत 18 वर्ष से कम आयु की बच्चियों की शादी के विरोध की बात सुनी थी। इसने फूल सी कोमल बच्ची की जिंदगी को संवार दिया। दरअसल, बागपत की पायल ने 17 नवंबर को चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर पर फोन कर अपना बाल विवाह रुकवाया था।
योगी सरकार की ओर से बाल विवाह रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाकर बच्चों को जागरूक किया जा रहा है। स्कूल कॉलेज से लेकर सामाजिक कार्यक्रम में भी विभिन्न माध्यम से इसकी जानकारी दी जा रही है। ऐसी ही जानकारी का लाभ बावली गांव की 13 वर्षीय बच्ची पायल को मिला मामला। 17 नवंबर 2025 का दिन है जब चाइल्ड हेल्पलाइन नंबरक 1098 पर पायल नाम की एक बच्ची ने अपना बाल विवाह रोकने के लिए गुहार लगाई। बच्ची के आवेदन पर तुरंत सहायता पहुंची। 17 नवंबर को उसका बाल विवाह होने से बचा लिया गया। 13 साल की बच्ची के इस कदम की सभी ने प्रशंसा की। बच्ची का नाम सरकार तक पहुंचा। महिला दिवस पर बच्ची को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से सम्मानित किया गया।
पायल के पिता शिवकुमार बताते हैं कि उन पर लाखों का कर्ज है। बेटे के इलाज में उनको सभी जमा पूंजी गंवानी पड़ी। इसके बाद भी बेटा नहीं बच पाया। ऐसे में उनको बेटी की शादी के लिए प्रस्ताव मिला। उन्होंने रिश्ता तय कर दिया। उनको बाल अधिकारों की जानकारी नहीं थी।
बावली गांव के रहने वाली पायल पुत्री शिवकुमार कक्षा 8 की होनहार छात्रा है। गांव के ही जैन मिलन शिशु मंदिर स्कूल में वह पढ़ाई कर रही थी। कक्षा 8 में उसने 88 प्रतिशत से अधिक अंक पाकर अपने पिता का मान बढ़ाया। लेकिन, पैसों के अभाव में कक्षा 9 में दाखिला नहीं हो पाया। इससे वह खुश नहीं थी। पायल पढ़ने में होशियार है। उसके शिक्षक बच्ची की प्रतिभा की प्रशंसा करते हैं। पायल का सपना है कि वह पढ़-लिख कर आईएएस बने, लेकिन उसकी गरीबी उसके सपनों में बाधा बनी हुई है। कक्षा 9 में दाखिला न होने पर उसकी एक साल की पढ़ाई छूट गई है। उसकी किसी ने मदद नहीं की।
महिला दिवस पर मिला सम्मान
बाल अधिकारों के प्रति जागरूक पायल ने अपना विवाह होने से बचा लिया। ऐसे में उसको यूपी सरकार की ओर से महिला दिवस पर सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में उसको प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। पायल अपनी मां के साथ लखनऊ आई थी। पायल कहती है कि वह इससे पहले कभी लखनऊ नहीं आई थी। मुख्यमंत्री से सम्मान पाकर वह खुश है। वह चाहती है कि उसके सपनों को पूरा करने में सरकार उसकी मदद करे।
पायल एक गरीब परिवार से आती हैं, जिनके परिवार पर लाखों का कर्ज है। लखनऊ से सम्मान तो मिला, लेकिन खाने के लिए रोजी-रोटी खुद ही करनी पड़ती है। लखनऊ से आते ही पायल अपने पिता के पास ईंट-भट्ठे पर काम करने में जुट गई है।
पायल के पिता शिवकुमार बताते हैं कि उनको एक बेटा और दो बेटियां हैं। एक बड़े बेटे की मृत्यु हो चुकी है, जिसके इलाज में वह कर्ज में डूब गए। घर में उनकी एक मां और दादी है। उनका यह परिवार छोटे से मकान में रहता है। ईंट-भट्ठे पर वह मजदूरी करके परिवार का भरण पोषण करते हैं। पिता का कहना है कि सरकार से उन्हें अभी तक कोई सहायता प्राप्त नहीं हुई है। पायल चाहती है कि उनके घर का कर्ज समाप्त हो जाए। इसके बाद वह निश्चिंत होकर अपनी पढ़ाई पूरी कर सके, अपना सपना पूरा कर सके।

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