‘आज रात 20 गुना ज्यादा हमला करेंगे’, होर्मुज संकट के बाद ट्रंप ने ईरान को दी चेतावनी

वाशिंगटन/एजेंसी। पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच अमेरिका और ईरान के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जहां ईरान को चेतावनी दी कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरनेवाले तेल टैंकरों की आवाजाही बाधित हुई तो अमेरिका 20 गुना ताकत से ईरान पर हमले करेगा।
वहीं, रिवोल्यूशनरी गा‌र्ड्स ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिकी हमले जारी रहे तो क्षेत्र से एक बूंद तेल भी बाहर नहीं जाने दिया जाएगा। दुनिया में बढ़ते तेल संकट के बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी बात की।
बता दें कि पुतिन ने सोमवार को चेतावनी दी थी कि यदि पश्चिम एशिया में संघर्ष लंबा खिंचता है तो वैश्विक ऊर्जा संकट और गहरा सकता है, क्योंकि खाड़ी क्षेत्र से तेल और गैस आपूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा था कि रूस ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने के लिए सहयोग करने को तैयार है।
न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, ट्रंप ने दावा किया कि ईरान युद्ध समाप्त करने के लिए अमेरिका से बात करना चाहता है और यदि वह नियमों और शर्तों के अनुसार बात करता है तो हम भी तैयार हैं। ट्रंप ने कहा कि ईरान की सामरिक क्षमता को बुरी तरह तबाह किया जा चुका है। हालांकि, आईआरजीसी ने ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए कहा कि युद्ध कब खत्म होगा, यह तेहरान तय करेगा।
ट्रंप ने कहा कि यदि ईरान ने तेल आपूर्ति को रोकने की कोशिश की तो अमेरिका उसके ऐसे ठिकानों को निशाना बनाएगा जिन्हें आसानी से नष्ट किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका का लक्ष्य वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखना है, क्योंकि इस मार्ग पर चीन सहित कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं निर्भर हैं।
रॉयटर के अनुसार, वैश्विक तेल बाजार में बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए ट्रंप प्रशासन कुछ देशों पर लगाए गए तेल से जुड़े प्रतिबंधों में अस्थायी ढील देने पर विचार कर रहा है। ट्रंप ने कहा कि कीमतें कम रखने के लिए कुछ पाबंदियां हटाई जा सकती हैं।
एएनआई के अनुसार, अमेरिका रूस के तेल पर लगे प्रतिबंधों को आंशिक रूप से कम करने पर भी विचार कर रहा है, ताकि बाजार में आपूर्ति बढ़ाई जा सके और कीमतों को स्थिर किया जा सके। पिछले सप्ताह अमेरिका ने भारत को समुद्र में पहले से मौजूद रूसी कच्चा तेल खरीदने की अस्थायी अनुमति भी दी थी, ताकि मध्य-पूर्व से आपूर्ति घटने की स्थिति में विकल्प उपलब्ध रहे।

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