कानपुर के मछरिया में जमीन विवाद में मिलीभगत के आरोप पर चौकी इंचार्ज व दारोगा निलंबित

कानपुर में जमीन विवाद को लेकर चौकी इंचार्ज और एक दारोगा को निलंबित किया गया है। आरोप है कि उन्होंने आरोपित पक्ष से मिलीभगत कर गलत विवेचना की, जबकि लेखपाल की जांच में दूसरा पक्ष गलत पाया गया।

कानपुर/उत्तर प्रदेश। मछरिया क्षेत्र में जमीन कब्जाने के विवाद में पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े होने के बाद आवास विकास चौकी इंचार्ज और नौबस्ता थाने में तैनात एक दारोगा को निलंबित कर दिया गया है। एक पक्ष द्वारा दोनों पुलिसकर्मियों पर आरोपित पक्ष से मिलीभगत कर जांच प्रभावित करने के आरोप लगाए गए थे, जो जांच में सही पाए गए। डीसीपी दक्षिण दीपेंद्रनाथ चौधरी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की है। साथ ही विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।
मामले के अनुसार, बिधनू थाना क्षेत्र के दहेली उजागर गांव निवासी अर्जुन सिंह ने वर्ष 1987 में नौबस्ता गांव निवासी लऊआ से आराजी संख्या 1168, रकबा 200 वर्गगज का प्लॉट खरीदा था। आरोप है कि मछरिया क्षेत्र के कुछ लोगों ने उक्त प्लॉट पर कब्जा करने का प्रयास किया और विरोध करने पर गाली-गलौज व मारपीट की। पीड़ित ने नौबस्ता थाने में शिकायत दी, लेकिन मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। बाद में डीसीपी से शिकायत के बाद जनवरी 2026 में आरोपितों के खिलाफ बलवा, धमकी और अपमान की धाराओं में केस दर्ज हुआ। इसके बावजूद अर्जुन सिंह ने आरोप लगाया कि चौकी इंचार्ज और एक दारोगा ने दूसरे पक्ष से मिलीभगत कर जांच को प्रभावित किया।
वहीं, दूसरे पक्ष का दावा है कि वे पिछले करीब 28 वर्षों से प्लॉट पर काबिज हैं और इस संबंध में मामला उच्च न्यायालय में भी विचाराधीन है। न्यायालय ने पुलिस-प्रशासन को हस्तक्षेप न करने के निर्देश दिए थे। जांच के दौरान लेखपाल की रिपोर्ट में सामने आया कि अर्जुन सिंह का दावा सही स्थान पर है, जबकि दूसरे पक्ष द्वारा बताई गई आराजी संख्या संबंधित प्लॉट से करीब 600 मीटर दूर की निकली। इसके बावजूद पुलिस द्वारा दूसरे पक्ष की शिकायत पर भी मुकदमा दर्ज किया गया, जिससे विवाद और बढ़ गया।
डीसीपी दक्षिण ने बताया कि जांच में पुलिसकर्मियों पर लगे आरोप सही पाए गए हैं, जिसके चलते उन्हें निलंबित किया गया है। उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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